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Shiv Sena UBT : छह सांसद आखिर बैठक से दूर क्यों रहे, अब पार्टी ने उठाया बड़ा कदम

मुंबई की सियासत में गुरुवार को उस समय हलचल और तेज हो गई जब शिवसेना उद्धव गुट की अहम संसदीय बैठक को लेकर तरह तरह (Shiv Sena UBT) की चर्चाएं शुरू हो गईं। राजनीतिक गलियारों में सुबह से ही यह सवाल उठता रहा कि आखिर किन कारणों से कई सांसद बैठक में नहीं पहुंचे। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच भी इस घटनाक्रम को लेकर लगातार चर्चा होती रही।

महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही उठापटक के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। पार्टी नेतृत्व अपने सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा दिखा, वहीं अनुपस्थित रहने वाले सांसदों को लेकर अटकलों का बाजार भी गर्म रहा। इसी बीच पार्टी ने सख्त रुख अपनाते हुए गैरहाजिर सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।

बैठक से गायब सांसदों पर कार्रवाई : Shiv Sena UBT

ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं के बीच शिवसेना नेता संजय राउत के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में संजय राउत, अरविंद सावंत, राजाभाऊ वाजे और अनिल देसाई मौजूद रहे। हालांकि व्हिप जारी किए जाने के बावजूद पार्टी के 9 सांसदों में से 6 बैठक में नहीं पहुंचे।

बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों के खिलाफ पार्टी ने कार्रवाई का फैसला लिया है। नेता अनिल देसाई ने बताया कि अनुपस्थित सांसदों को शो कॉस नोटिस भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उद्धव ठाकरे से भी चर्चा हो चुकी है।

आगे की रणनीति पर मंथन

बैठक समाप्त होने के बाद संजय राउत के प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की जानकारी दी गई। गुरुवार सुबह अरविंद सावंत दिल्ली स्थित अपने निवास से निकलकर संजय राउत के आवास पहुंचे थे। यहां पार्टी की आगामी रणनीति और राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई।

इसी दौरान संजय राउत ने सामाजिक मंच एक्स पर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक स्थिति के लिए इतिहास भाजपा को कभी माफ नहीं करेगा।

छह सांसदों के पाला बदलने की चर्चा

फिलहाल उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के पास 9 सांसद (Shiv Sena UBT) हैं। राजनीतिक सूत्रों के बीच चर्चा है कि इनमें से 6 सांसद अलग रास्ता अपना सकते हैं। इससे पहले भी शिवसेना में बड़ी टूट देखने को मिली थी जब एकनाथ शिंदे कई विधायकों को अपने साथ लेकर अलग हो गए थे और बाद में भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई थी। बाद के घटनाक्रम में पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न भी शिंदे गुट को मिला। इसके बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले धड़े को नया संगठनात्मक नाम अपनाना पड़ा।

संसदीय दल की बैठक में सिर्फ तीन सांसद पहुंचे

सूत्रों के अनुसार संसदीय दल की बैठक में केवल तीन लोकसभा सांसद उपस्थित रहे। अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ने बैठक में हिस्सा लिया जबकि छह सांसद अनुपस्थित रहे।

दावा किया जा रहा है कि कुछ सांसदों ने अलग संसदीय समूह बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है और इससे जुड़ा पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी सौंपा गया है। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। पार्टी व्हिप के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

बैठक से अनुपस्थित बताए जा रहे सांसदों में संजय जाधव, भाउसाहेब वाकचौरे, ओमराजे निंबलकर, संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश पाटिल आष्टिकर शामिल हैं।

व्हिप का पालन नहीं करने पर बढ़ सकती है मुश्किल

संजय राउत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि संसदीय दल की बैठक एक संवैधानिक और संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा था कि जो सांसद बैठक में शामिल नहीं होंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

राउत के इस बयान को उस समय और अधिक महत्वपूर्ण माना गया जब कई सांसदों के शिंदे गुट के संपर्क में होने की चर्चाएं सामने आने लगीं। इसी वजह से इस बैठक पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई थीं।

निष्कासन तक पहुंच सकता है मामला

संजय राउत और अरविंद सावंत ने कहा है कि तीन लाइन के व्हिप के बावजूद बैठक से दूरी बनाने वाले सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई (Shiv Sena UBT) संभव है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संगठनात्मक अनुशासन का पालन सभी जनप्रतिनिधियों के लिए आवश्यक है।

दोनों नेताओं ने उदाहरण देते हुए कहा कि अतीत में भी संसदीय नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त फैसले लिए गए हैं। इसी आधार पर अनुपस्थित सांसदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ निष्कासन जैसे कदमों पर भी विचार किया जा सकता है।

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