छत्तीसगढ़

Sai Cabinet Decisions: साय कैबिनेट के 11 बड़े फैसले, कारोबार से किरायेदारी तक कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 11 महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर (Sai Cabinet Decisions) लगी। कैबिनेट ने बिजली भुगतान व्यवस्था में बदलाव, बस्तर फाइटर्स के सेवा नियमों में संशोधन, निजी विश्वविद्यालय कानून में बदलाव, जीएसटी और वैट संशोधन विधेयकों, उद्योग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े नए कानून, एनआरडीए की ओटीएस योजना, जल प्रदूषण कानून, भाडा नियंत्रण अधिनियम में संशोधन तथा राजनांदगांव में 2000 सीट क्षमता वाले आधुनिक आडिटोरियम के लिए भूमि आबंटन जैसे अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से निवेश, रोजगार, उच्च शिक्षा, कारोबार और प्रशासनिक व्यवस्था को नई गति मिलेगी।

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की ओर से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के बिजली उपक्रमों को भुगतान के लिए मौजूदा ट्रिपार्टाइट एग्रीमेंट की जगह आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (डीडीएम) व्यवस्था लागू करने की मंजूरी दी। इससे एनटीपीसी सहित अन्य केंद्रीय बिजली कंपनियों से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि इससे राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा और लेटर ऑफ क्रेडिट की व्यवस्था भी पहले की तरह जारी रहेगी।

बस्तर फाइटर्स और निजी विश्वविद्यालय कानून में संशोधन Sai Cabinet Decisions

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ पुलिस विशेष कार्यपालिक बल (बस्तर फाइटर्स) भर्ती एवं सेवा नियम, 2026 में संशोधन को मंजूरी दी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रारूप को भी स्वीकृति दी गई।

नए प्रावधानों के तहत निजी विश्वविद्यालयों में विन्यास निधि की जगह रक्षित निधि का प्रावधान किया जाएगा। साथ ही यूजीसी और अन्य नियामक संस्थाओं के मानकों के अनुरूप आधारभूत अधोसंरचना, पुस्तकालय और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा और विद्यार्थियों के हित सुरक्षित रहेंगे।

जीएसटी, वैट और उद्योगों के लिए बड़े फैसले

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी देते हुए वाणिज्यिक कर अधिकरण समाप्त करने का निर्णय लिया। अधिकरण में लंबित सभी मामलों का स्थानांतरण अब राजस्व मंडल को किया जाएगा।

इसके अलावा छत्तीसगढ़ माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य जीएसटी कानून को सरल बनाना, रिफंड प्रक्रिया को तेज करना तथा निर्यातकों और उद्योगों को राहत देना है।

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि इससे निवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में नया कानून, देश का पहला राज्य बनने का दावा

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनिमय-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी। सरकार का दावा है कि इस तरह का कानून लागू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला (Sai Cabinet Decisions) राज्य होगा।

विधेयक में डीम्ड परमिशन, सेल्फ सर्टिफिकेशन, थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन, रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन और दोहरे लाइसेंस की बाध्यता समाप्त करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इससे उद्योगों की स्थापना और कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और समयबद्ध होगी।

एनआरडीए की ओटीएस योजना और पर्यावरण कानून को मंजूरी

कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) के आबंटित भूखंडों और निर्मित परिसरों पर बकाया ब्याज एवं अधिभार में राहत देने के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना-2026 को मंजूरी दी। इससे पात्र आबंटितियों को बकाया राशि नियमित करने, परियोजनाएं पूरी करने या भूमि सरेंडर करने का अवसर मिलेगा।

इसके साथ ही जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को राज्य में लागू करने के लिए विधानसभा में संकल्प लाने का निर्णय भी लिया गया। संशोधित कानून के तहत छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाकर आर्थिक दंड का प्रावधान किया जाएगा।

किरायेदारी कानून में बदलाव, राजनांदगांव को मिलेगा आधुनिक आडिटोरियम

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ भाडा नियंत्रण अधिनियम, 2011 में संशोधन के प्रारूप को भी मंजूरी (Sai Cabinet Decisions) दी। इसका उद्देश्य खाली मकानों को किराये पर देने को प्रोत्साहित करना और मकान मालिक तथा किरायेदारों के बीच विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। संशोधन में दोनों पक्षों के अधिकार और दायित्व स्पष्ट किए गए हैं।

बैठक में राजनांदगांव में 2000 सीट क्षमता वाले आधुनिक आडिटोरियम के निर्माण के लिए आवश्यक शासकीय भूमि आबंटित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। सरकार का मानना है कि इससे जिले में सांस्कृतिक और सार्वजनिक आयोजनों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

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