Reservation Promotion : प्रमोशन में आरक्षण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, फिलहाल नहीं लगेगी रोक, विशेष पीठ करेगी अंतिम सुनवाई
मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर चल रहे बहुचर्चित मामले में सोमवार को हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण (Reservation Promotion) आदेश दिया। अदालत ने फिलहाल प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगाने या किसी भी पक्ष को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अब इस मामले की अंतिम सुनवाई विशेष युगलपीठ के समक्ष होगी, जिसका गठन जल्द किया जाएगा।
अदालत के इस फैसले के बाद प्रदेश के हजारों शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की नजर अब विशेष पीठ की सुनवाई पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि इसी सप्ताह इस मामले में विस्तृत सुनवाई हो सकती है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने खुद को किया अलग Reservation Promotion
मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष चल रही थी। सुनवाई के दौरान आरबी राय प्रकरण का उल्लेख होने पर जस्टिस विवेक रूसिया ने बताया कि वह इस मामले में पहले अधिवक्ता के रूप में पेश हो चुके हैं। न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्होंने स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया।
विशेष युगलपीठ करेगी अंतिम फैसला
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल प्रमोशन प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी और न ही किसी पक्ष को अंतरिम राहत मिलेगी। साथ ही यह भी कहा गया कि अब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश इस मामले की सुनवाई के लिए विशेष युगलपीठ का गठन करेंगे। संभावना है कि एक या दो दिन के भीतर नई पीठ गठित कर दी जाएगी और इसके बाद अंतिम सुनवाई शुरू होगी।
दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क Reservation Promotion
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने पक्ष रखा। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा और नमन नगरथ उपस्थित रहे। अजाक संघ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह सहित अन्य अधिवक्ताओं ने भी अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे।
हजारों कर्मचारियों पर रहेगा फैसले का असर
प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े इस मामले का असर राज्य के बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों (Reservation Promotion) पर पड़ने वाला है। अब सभी की निगाहें विशेष युगलपीठ की अंतिम सुनवाई पर हैं, जहां आरक्षण संबंधी प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर विस्तार से विचार किया जाएगा।



