राजनीति

Punjab Election : पंजाब में किसकी बनेगी सरकार, चुनाव से पहले बदले समीकरणों ने बढ़ाई सभी दलों की बेचैनी

पंजाब की राजनीति में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी हलचल तेज हो गई है। लोकसभा चुनाव के बाद अब सभी दल अपने अपने समीकरण साधने में जुटे हैं। वोटों का गणित, नए गठजोड़ की संभावनाएं और नेताओं के बीच अंदरूनी खींचतान चुनावी मुकाबले को पहले से ज्यादा दिलचस्प बना रही है।

राज्य में इस बार मुकाबला सीधा नहीं बल्कि कई दलों के बीच होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में छोटे से वोट प्रतिशत का उतार चढ़ाव भी सरकार बनाने और सत्ता से बाहर होने का कारण बन सकता है। इसी राजनीतिक तस्वीर का वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार आदेश रावल ने विस्तार से विश्लेषण किया।

वोट प्रतिशत का बदलता गणित Punjab Election

विश्लेषण के दौरान बताया गया कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को करीब 42 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि लोकसभा चुनाव में उसका वोट प्रतिशत घटकर करीब 26 प्रतिशत रह गया।

कांग्रेस को भी लगभग 26 प्रतिशत वोट मिले, लेकिन उसे ज्यादा सीटें हासिल हुईं। वहीं भारतीय जनता पार्टी को करीब 18 प्रतिशत और शिरोमणि अकाली दल को लगभग 13 प्रतिशत वोट मिले। ऐसे में यदि विधानसभा चुनाव में मुकाबला चार प्रमुख दलों के बीच रहता है तो करीब 30 प्रतिशत वोट हासिल करने वाला दल सरकार बनाने की मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।

महिलाओं की योजना से आप को उम्मीद

विश्लेषण में यह भी कहा गया कि विधानसभा चुनावों में क्षेत्रीय दलों को सामान्य तौर पर अधिक लाभ मिलता है। आम आदमी पार्टी सरकार ने महिलाओं के लिए हर महीने आर्थिक सहायता देने की योजना लागू कर दी है, जिससे उसे चुनावी लाभ मिलने की उम्मीद है।

इसी वजह से मौजूदा राजनीतिक हालात में आम आदमी पार्टी को शुरुआती बढ़त मिलने की संभावना जताई गई, जबकि कांग्रेस के सामने चुनौती अधिक दिखाई (Punjab Election) दे रही है।

अकाली और भाजपा की संभावित साझेदारी पर नजर

आदेश रावल ने कहा कि चुनाव का सबसे बड़ा मोड़ अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के संभावित गठबंधन से आ सकता है। यदि दोनों दल साथ आते हैं तो यह मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है और आम आदमी पार्टी तथा कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती बढ़ सकती है।

उनके अनुसार चुनाव में गठबंधन की स्थिति कई सीटों पर परिणामों को सीधे प्रभावित कर सकती है।

जट सिख वोट बैंक पर रहेगा फोकस

विश्लेषण में कहा गया कि पंजाब का सबसे प्रभावशाली जट सिख वोट बैंक इस बार कई हिस्सों में बंटता दिखाई दे रहा है।

बताया गया कि इस वोट बैंक पर वारिस पंजाब दे, शिरोमणि अकाली दल, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस सभी की नजर है। यदि यह वोट अलग अलग दलों में बंटता है तो इसका सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है।

कांग्रेस की अंदरूनी चुनौती

पंजाब कांग्रेस की स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा गया कि पार्टी लंबे समय से गुटबाजी का सामना करती रही है। हालांकि कांग्रेस की ताकत यह रही है कि उसे विभिन्न सामाजिक वर्गों से समर्थन मिलता रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के कार्यकाल का भी जिक्र किया गया। बताया गया कि उस समय पार्टी के भीतर कई नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। अब कई पुराने चेहरे सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन संगठन के भीतर मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

नेतृत्व को लेकर अब भी असमंजस

विश्लेषण में कहा गया कि कांग्रेस नेतृत्व पंजाब में संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया में अपेक्षाकृत धीमा (Punjab Election) नजर आया है। नई प्रदेश टीम बनने के बाद भी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है।

अंदरूनी बैठकों और अलग अलग नेताओं की सक्रियता को देखते हुए यह संकेत भी दिए गए कि आने वाले दिनों में पंजाब कांग्रेस के भीतर और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

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