संपादकीय: बेरोजगारी एक विकट समस्या
Unemployment – A Grave Problem: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रोजगार मेले का शुभारंभ करते हुए 51 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटे और उन्होंने कहा कि सरकार देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए हर मोर्चे पर काम कर रही है। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की यह कोशिश है कि युवाओं की पढ़ाई और उनका कौशल बदलती अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के साथ चले स्टार्टअप ईको सिस्टम को भारतीय युवाओं के सामथ्र्य का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि आज गांव और कस्बों का युवा भी भारत की नई अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने निजी क्षेत्र में भी रोजगार के नये अवसर बढऩे की बात करते हुए कहा कि विकसित भारत रोजगार योजना इसी उद्देश्य को सामने रखकर शुरू की गई और इस योजना पर लगभग एक लाख करोड़ रूपये खर्च किये जा रहे हैं। विकसित भारत बनाने में युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका है और युवाओं को बेहतर शिक्षा के साथ ही रोजगार प्रदान करना सरकार का संकल्प है क्योंकि भारतीय युवाओं ने अपनी प्रतिभा से पूरे विश्व का विश्वास जीता है और सारी दुनिया को भारत की युवा शक्ति से बहुत उम्मीदें हैं।
दरअसल भारत में जिस तेजी से जंसख्या बढ़ रही है उस अनुपात में रोजगार के साधन उपलब्ध न होने के कारण हर साल लाखों पढ़े लिखे बेरोजगारों की फौज तैयार हो रही है अब सबको तो सरकारी नौकरी मिल नहीं सकती। ऐसे में निजी क्षेत्रों में ही रोजगार के अवसर बढ़ाने का काम किया जा सकता है। भारत में सर्वाधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र कृषि है जिससे ग्रामीण युवाओं को सर्वाधिक रोजगार मिलता है। कृषि के साथ ही जुड़े पशुपालन और मत्स्य पालन सहित कृषि उत्पादों के कार्य में भी बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिल रहा है किन्तु अब ग्रामीण युवा भी कृषि से किनारा कर अन्य क्षेत्रों में रोजगार तलाशने लगे हैं। उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला दूसरा क्षेत्र है। किन्तु वहां भी वैज्ञानिक उपकरणों और मशीनों के अधिकाधिक उपयोग के कारण रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। नतीजतन बेराजगारी की समस्या दिन बदिन जटिल होती जा रही है। बेरोजगारी एक बड़ी समाजिक व आर्थिक समस्या है जिसका न सिर्फ युवाओं पर बल्कि पूरे समाज पर प्रभाव पड़ता है।
रोजगार के अभाव में युवाओं का आत्मविश्वास टूट रहा है और कई युवा तो खुदकुशी करने पर भी बाध्य हो रहे हैं। बेरोजगारी (Unemployment – A Grave Problem) की वजह से ही अपराध दर में भी बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में अब यह आवश्यक है कि स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाये। कौशल विकास को बढ़ाने के साथ ही व्यवसायिक तथा तकनीकी शिक्षा पर भी ध्यान देना होगा। स्कूलों से भी छात्रों को व्यवसायिक और तकनीकी शिक्षा के पाठ्यक्रम लागू करने होंगे। इस तरह की रोजगारोन्मुखी शिक्षा से ही बेरोजगारी की विकट समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है। केन्द्र सरकार ने जब से स्वारोजगार और स्टार्टअप को प्राथमिकता दी है तब से इसके सुपरिणाम भी सामने आने लगे हैं।
पिछले साल देश में बेरोजगारी की दर 5.1 प्रतिशत थी जो इस साल घट का पांच प्रतिशत रह गई है। हालांकि यह कमी बेहद मामूली है लेकिन इसे एक शुभ संकेत माना जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारी की दर 4.1 प्रतिशत है जबकि शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दल 6.8 प्रतिशत है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह कृषि और कृषि आधारित उद्योगों में रोजगार के ज्यादा अवसर उत्पन्न करे और साथ शहरी क्षेत्र में बेरोजगारी की दर घटाने उद्योगों को भी बढ़ावा दे तभी युवाओं को रोजगार के नये अवसर मिलेंगे और वे राष्ट्र के नवनिर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करा पाएंगे।



