छत्तीसगढ़

कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले में तीन दोषियों को 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास, 10 लाख रुपये का अर्थदंड भी

रायपुर। नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की कार्रवाई में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री और आपूर्ति से जुड़े मामले में तीन आरोपियों को कठोर सजा सुनाई गई है। माननीय विशेष न्यायालय (NDPS एक्ट), रायपुर ने युवराज सिंह चौहान, वाजिद खान और निहाल सिंह को दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। तीनों दोषियों पर कुल 10 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

पुलिस के अनुसार, थाना आमानाका में 16 अक्टूबर 2025 को अपराध क्रमांक 340/2025 के तहत मामला दर्ज किया गया था। विवेचना पूरी होने के बाद 1 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया। प्रकरण में 28 अक्टूबर 2026 को जारी सजायाबी वारंटों के अनुसार, अपराध पंजीयन से 377 दिन और चालान प्रस्तुत होने के बाद 210 दिनों के भीतर दोषसिद्धि एवं सजा की कार्रवाई पूरी हुई।

एम्स के गेट नंबर-4 के पास ई-रिक्शा से मिली थी सिरप

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि जीई रोड, टाटीबंध स्थित एम्स अस्पताल के गेट नंबर-4 के पास दो व्यक्ति ई-रिक्शा में नशीली कफ सिरप रखकर बिक्री के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं। सूचना पर उप निरीक्षक मिनेश्वर बघेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर ई-रिक्शा में मौजूद युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान को पकड़ा।

तलाशी के दौरान ई-रिक्शा की पिछली सीट पर रखे बैग से Glankof-T की 100-100 एमएल की 40 शीशियां बरामद हुईं। इनमें कुल 4 लीटर कोडीनयुक्त कफ सिरप थी, जिसकी कीमत 9,200 रुपये बताई गई। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी सिरप रखने अथवा बिक्री करने के संबंध में वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद सिरप, घटना में प्रयुक्त ई-रिक्शा और मोबाइल फोन जब्त कर मामला दर्ज किया गया।

स्थानीय बिक्री से आपूर्तिकर्ता तक पहुंची जांच

पुलिस ने विवेचना को केवल बरामदगी और मौके पर पकड़े गए आरोपियों तक सीमित नहीं रखा। पूछताछ के दौरान युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान से मिली जानकारी के आधार पर चरोदा, जिला दुर्ग निवासी निहाल सिंह की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उसे भी 16 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया। इस तरह मामले में स्थानीय स्तर पर बिक्री के साथ सिरप की आपूर्ति से जुड़ी अगली कड़ी की भी जांच की गई।

प्रकरण में जब्त सिरप का न्यायालय के समक्ष भौतिक सत्यापन और इन्वेंटरी संबंधी प्रक्रिया पूरी कराई गई। इसके बाद विधि विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर से वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया। आरोपियों के मोबाइल नंबरों की ग्राहक आवेदन पत्रिका (CAF) और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) प्राप्त कर आपसी संपर्क एवं आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस ने गवाहों के कथन और अन्य दस्तावेजी एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य संकलित करने के बाद NDPS एक्ट की धारा 21(C) और 29 के तहत अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।

न्यायालय ने सुनाई अलग-अलग सजाएं

विशेष न्यायाधीश (NDPS एक्ट), रायपुर श्रीमती किरण थवाईत के न्यायालय ने तीनों दोषियों को निम्नानुसार दंडित किया

  • युवराज सिंह चौहान: धारा 21(C) तथा धारा 29 सहपठित धारा 21(C) के तहत प्रत्येक अपराध में 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास और प्रत्येक अपराध के लिए 2-2 लाख रुपये अर्थदंड। कुल अर्थदंड 4 लाख रुपये।
  • वाजिद खान: धारा 21(C) तथा धारा 29 सहपठित धारा 21(C) के तहत प्रत्येक अपराध में 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास और प्रत्येक अपराध के लिए 2-2 लाख रुपये अर्थदंड। कुल अर्थदंड 4 लाख रुपये।
  • निहाल सिंह: धारा 29 सहपठित धारा 21(C) के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 लाख रुपये अर्थदंड।

न्यायालय के आदेश के अनुसार, युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान को सुनाई गई कारावास की सजाएं साथ-साथ भुगताई जाएंगी। तीनों दोषियों पर कुल 10 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

विवेचना और अभियोजन के समन्वय पर जोर

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में नशे के अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में विवेचना, अभियोजन और ट्रायल मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन में गवाहों की समय पर न्यायालय में उपस्थिति, समन एवं वारंट की तामीली और अभियोजन से समन्वय के माध्यम से मामलों के समयबद्ध निराकरण के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस प्रकरण में घेराबंदी, बरामदगी और विवेचना में उप निरीक्षक मिनेश्वर बघेल, सहायक उप निरीक्षक प्राणेश्वर वर्मा तथा आरक्षक दीपक पाण्डेय, गुलशन चौबे और आशीष शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। चालानी कार्रवाई निरीक्षक एवं थाना प्रभारी आमानाका सुधांशु बघेल द्वारा की गई।

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