Nana’s Passing is an irreparable Loss: नाना का जाना अपूर्णीय क्षति
सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता विश्वनाथ पाटेकर जिन्हें फिल्मी दुनिया में नाना पाटेकर (Nana’s passing is an irreparable loss) के नाम से जाना जाता रहा है। उनका 75 साल की आयु में आकस्मिक निधन हो गया। नाना का यूं चले जाना उनके करोड़ों चाहने वालों को रूला गया। नाना पाटेकर अपने आप में अभिनय की पाठशाला ही नहीं बल्कि पूरी यूनिवर्सिटी थे। वे अभिनय करते नहीं थे बल्कि अभिनय को जीते थे। उनकी अद्भुत अभिनय क्षमता और दमदार संवाद अदाएगी ने उन्हें करोड़ो सिने प्रेमियों का सबसे चहेता कलाकार बना दिया था।
फिल्म अंकुश से यशवंत, अग्रिसाक्षी, अंगार, प्रहार, परिंदा, क्रंातिवीर, तिरंगा, कोहराम आदि फिल्मों से लेकर वेलकम तक नाना पाटेकर द्वारा बोले गये संवाद आज भी उनके प्रशंसकों को जुबानी याद हैं। उनका सबसे चर्चित संवाद – एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है यह तो मानों कालजयी डॉयलॉग बन गया है। नाना पाटेकर को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में अनेक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तथा फिल्मफेयर पुरस्कार मिले थे, उन्हें सरकार ने पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा था। नाना पाटेकर जितने अच्छे अभिनेता थे उतने ही अच्छे इंसान भी थे। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सादा जीवन उच्च विचार को आत्मसात कर लिया था। करोड़ों रूपये कमाने के बावजूद वे बेहद साधारण तरीके से जीवन यापन करते थे।
मात्र सौ रूपये वाली चप्पल पहनते थे और मुंबई में एक अतिसाधारण वन बीएचके घर में रहते थे। उन्होंने अपनी कमाई का 90 प्रतिशत हिस्सा लोगों की भलाई के लिए गरीबों, जरूरतमंदों और किसानों को दान कर दिया था। उन्होंने नाम फाउंडेशन बनाया था जिसके माध्यम से वे बच्चों की शिक्षा और किसानों की मदद के लिए हमेशा काम करते रहे और अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा जनसेवा में लगा दिया। सामाजिक सरोकार से जुड़े रहे नाना पाटेकर पूरी बेबाकी से अपनी बात भी रखा करते थे। चाहे फिल्मों में हो या सार्वजनिक जीवन में वे सच बात बोलने से कभी नहीं हिचकते थे।
हाल ही में जब खाड़ी संकट के चलते भारत में पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की किल्लत मची थी तब उन्होंने ट्वीट किया था कि हम कब तक पेट्रोल डीजल और गैस के लिए दूसरों पर निर्भर रहेंगे। क्या भारत सिर्फ शराब के मामले में ही आत्मनिर्भर बना रहेगा। इतनी बड़ी बात पूरी बेबाकी से नाना पाटेकर (Nana’s passing is an irreparable loss) ही बोल सकते थे वो भी इसलिए क्योंकि उन्होंने अपना जीवन जनसेवा के लिए समर्पित कर दिया था। भारत में ऐसे भी कई लोग जो समाज सेवा करके प्रचार पाते हैं और फिर राजनीति में आ जाते हैं।
किन्तु नानापाटेकर ने कभी अपनी समाजसेवा का ढिंडोरा नहीं पीटा और न ही कभी राजनीति के दलदल में पांव रखने की कोशिश की। जबकि कई राजनीतिक पार्टियां उन्हें राजनीति में लाने का प्रयास कर चुकीं थीं। वाकई नाना पाटेकर जैसा अभिनेता और व्यक्ति बिरला ही कोई होता है। अद्भुत अभिनय कौशल के धनी नाना पाटेकर सरल और सहज व्यक्तित्व के धनी थे जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते थे। फिल्म इंडस्ट्रीज में भी नाना पाटेकर के सभी सहकलाकारों के साथ दोस्ताना तालुकात थे।
फिल्म इंडस्ट्रीज में राजकुमार के बाद नाना पाटेकर को ही मूडी एक्टर माना जाता रहा है। फिल्म तिरंगा के निर्देशक ने जब राजकुमार और नाना पाटेकर को एक साथ फिल्म में लिया था तब अन्य निर्माता निर्देशकों ने उन्हें चेताया था कि वे बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। राजकुमार और नाना पाटेकर (Nana’s passing is an irreparable loss) बेशक बेहतरीन अभिनेता हैं लेकिन इनमें कभी भी विवाद खड़ा हो सकता है और इनमें से कोई या दोनों ही फिल्म को अधूरी छोड़कर जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो आप बर्बाद हो जाएंगे किन्तु फिल्म निर्माता और निर्देशक ने यह जोखिम उठाया और पूरी फिल्म बनते तक दोनों के बीच कोई विवाद नहीं हुआ। बल्कि दोनों ने मिलकर फिल्म में नई जान डाल दी जिसकी वजह से फिल्म सुपरहिट हुई।
कहने का तात्पर्य यह कि नाना पाटेकर अपने काम को पूजा समझते थे और अपना सर्वश्र्रेष्ठ देने की हर संभव कोशिश करते थे और इसमें वे कितने सफल हुए वह उनकी फिल्मों में देखा जा सकता था। हर फिल्म में उन्होंने जीवंत अभिनय किया । उनकी हर फिल्म चर्चित रही और उससे भी ज्यादा लोकप्रिय उनके संवाद रहे निश्चित रूप से वे एक विलक्षण प्रतिभा के धनी अभिनेता थे।
नाना का यूं जाना हिन्दी और मराठी फिल्मों के लिए अपूर्णीय क्षति है। नाना पाटेकर पर सटीक बैठती है ये पंक्तियां –
हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पर रोती रही,
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दिदावर पैदा।



