छत्तीसगढ़

High Court Departmental Inquiry : 3 पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रगति पर अदालत सख्त, अब फिर मांगा गया जवाब

लंबे समय से चल रहे एक मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पुलिस विभाग से जवाबदेही को लेकर कड़ा रुख (High Court Departmental Inquiry) अपनाया है। अदालत ने साफ किया है कि विभागीय कार्रवाई की स्थिति केवल औपचारिक जानकारी तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उसकी ताजा प्रगति भी रिकॉर्ड पर लाई जानी चाहिए।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी गई। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली तारीख तय करते हुए पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारी से नया हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं।

डीजीपी से मांगी गई नई स्थिति रिपोर्ट High Court Departmental Inquiry

उच्च न्यायालय ने तीन उप पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ प्रस्तावित विभागीय कार्रवाई की मौजूदा स्थिति पर राज्य के पुलिस महानिदेशक को नया शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 तय की है।

वर्ष 1992 की एफआईआर से जुड़ा है मामला

यह मामला याचिकाकर्ता मनोहरलाल चौधरी द्वारा वर्ष 1992 में दर्ज एफआईआर को निरस्त कराने के लिए दायर याचिका से संबंधित है। इससे पहले 17 जून 2026 को अदालत ने डीजीपी को निर्देश दिया था कि 12 जून 2026 को तीन डीएसपी के खिलाफ लघु दंड की सिफारिश पर हुई कार्रवाई की जानकारी हलफनामे के माध्यम से प्रस्तुत की जाए।

सरकार ने बताया कार्रवाई विचाराधीन

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि तीनों डीएसपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश फिलहाल राज्य सरकार के विचाराधीन है। इस संबंध में 22 जून 2026 को शासन को रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है।

इस जानकारी के बाद अदालत ने डीजीपी को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले 12 जून 2026 की सिफारिश पर अब तक हुई पूरी प्रगति का स्पष्ट विवरण नए हलफनामे के साथ प्रस्तुत (High Court Departmental Inquiry) किया जाए।

चार्जशीट को चुनौती देने की मिली छूट

मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को चार्जशीट के खिलाफ कानूनी चुनौती देने की अनुमति भी दी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत चार्जशीट को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं।

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