छत्तीसगढ़

Chhattisgarh High Court Humane Decision : 10 साल की कड़ी सजा काट रहा भाई पुलिस कस्टडी में कराएगा बहन की विदाई

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक परंपराओं को सर्वोपरि रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है। अदालत ने डकैती और साजिश के गंभीर मामले में 10 साल की सश्रम कारावास की सजा काट रहे एक कैदी को उसकी सगी बहन की शादी की विदाई की रस्मों में शामिल होने की इजाजत दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने उसे अंतरिम जमानत देने के बजाय कड़े पुलिस पहरे (पुलिस कस्टडी) में रस्में निभाने की अनुमति दी है। यह संवेदनशील आदेश हाई कोर्ट के जस्टिस राधाकृष्ण अग्रवाल की एकल पीठ ने दुर्ग जिले के सुपेला निवासी आरोपी मनीष बंसोर की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया।

इकलौता भाई है मनीष, सामाजिक रस्मों के लिए मांगी थी मोहलत

सुपेला (भिलाई) के कृष्णानगर निवासी मनीष बंसोर (29 वर्ष) को दुर्ग की विशेष अदालत ने 18 नवंबर 2025 को दोषी करार दिया था। मनीष को आईपीसी की धारा 120-बी के तहत 7 साल और धारा 397 के तहत 10 साल की कड़े कारावास की सजा सुनाई गई है, और वह वर्तमान में केंद्रीय जेल में बंद है।

मनीष के वकील आदित्य भारद्वाज ने कोर्ट में अंतरिम जमानत आवेदन दायर कर दलील दी थी कि मनीष की सगी बहन की शादी 29 जून 2026 को भिलाई के ‘श्री राधे-राधे पैलेस’ (उमरपोटी, धनोरा रोड) में संपन्न हो रही है और 30 जून को उसकी विदाई होनी है। परिवार में मनीष के अलावा और कोई दूसरा भाई नहीं है, जो भाई की मुख्य सामाजिक और पारंपरिक रस्मों को पूरा कर सके।

राज्य सरकार का विरोध और कोर्ट का ‘बीच का रास्ता’

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैनल लॉयर ऋषिकेश शर्मा ने अंतरिम जमानत का कड़ा विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी धारा 397 जैसे बेहद गंभीर और हिंसक अपराध का सजायाफ्ता कैदी है, इसलिए उसे खुला नहीं छोड़ा जा सकता। हालांकि, उन्होंने मानवीय पक्ष को देखते हुए सुझाव दिया कि यदि अदालत उचित समझे, तो आरोपी को पुलिस अभिरक्षा (कस्टडी) में विदाई समारोह में भेजा जा सकता है। जस्टिस राधाकृष्ण अग्रवाल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद भाई-बहन के रिश्ते के महत्व को समझा और अंतरिम जमानत नामंजूर करते हुए पुलिस कस्टडी में जाने का रास्ता निकाला।

सुबह 9 से शाम 5 बजे तक की मिली मोहलत

हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court Humane Decision) ने संबंधित जेल अधीक्षक और दुर्ग पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया है कि वे आवश्यक सुरक्षा इंतजामों के साथ मनीष बंसोर को 30 जून 2026 को सुबह 09:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक (कुल 8 घंटे) पुलिस अभिरक्षा में भिलाई स्थित विवाह स्थल लेकर जाएं, ताकि वह अपनी बहन की विदाई की रस्में पूरी कर सके। शाम 5 बजे रस्म खत्म होते ही पुलिस उसे तत्काल वापस जेल दाखिल कराएगी।

याचिका में टाइपिंग की गलती भी हुई दुरुस्त

मामले की सुनवाई के दौरान आवेदन में एक टाइपिंग की गलती भी सामने आई, जहां जल्दबाजी के कारण मनीष बंसोर की जगह “बन्नूराम सिन्हा” नाम टाइप हो गया था। हाई कोर्ट ने इस त्रुटि को भी तुरंत सुधारने की अनुमति दे दी। कोर्ट अब इस मुख्य क्रिमिनल अपील पर अगस्त 2026 के पहले हफ्ते में आगे की सुनवाई करेगा।

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