राजनीति

Badrinath Dham Mayawati : चढ़ावे की गड़बड़ी पर बढ़ा सियासी घमासान, अब दोनों बड़े धामों की जांच को लेकर उठी नई मांग

अयोध्या और बद्रीनाथ धाम से जुड़ी चढ़ावे की गड़बड़ी की चर्चाएं मंगलवार को राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच (Badrinath Dham Mayawati) तेज रहीं। धार्मिक आस्था से जुड़े इस मामले पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और अब पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।

मंदिरों में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने बहस को और तेज कर दिया है। लोगों का कहना है कि अगर कहीं भी वित्तीय अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। इसी बीच इस मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए हैं।

दोनों मंदिर ट्रस्टों की जांच की मांग Badrinath Dham Mayawati

बसपा प्रमुख मायावती ने अयोध्या के राम मंदिर और उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी और गबन के मामलों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दोनों धार्मिक स्थलों के ट्रस्ट से जुड़े मुख्य प्रबंधकों की भी निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की गई तो भविष्य में भी ऐसे मामलों का दुरुपयोग हो सकता है। उनके अनुसार, यदि निचले स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी वजह या तो मुख्य प्रबंधकों की मिलीभगत हो सकती है या फिर उनकी लापरवाही।

सरकार और जांच एजेंसी से विशेष ध्यान देने की अपील

मायावती ने कहा कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच होना जरूरी (Badrinath Dham Mayawati) है। उन्होंने सरकार और विशेष जांच दल से अपील की कि इस प्रकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो।

विपक्ष के दावों पर भी उठाए सवाल

बसपा प्रमुख ने अपने बयान में कहा कि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने राम मंदिर के चढ़ावे में बड़ी रकम की कथित चोरी के दावे किए हैं। ऐसे में सरकार को इन नेताओं से उनके दावों के समर्थन में ठोस और पुख्ता सबूत मांगने चाहिए, ताकि वास्तविक दोषियों की पहचान हो सके और कोई भी कानून से बच न पाए।

सबूत नहीं मिले तो राजनीति मानी जाएगी

मायावती ने कहा कि यदि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण पेश नहीं कर पाता है तो जनता इसे केवल राजनीतिक मुद्दा (Badrinath Dham Mayawati) मानेगी। उनका कहना था कि राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ दल जनहित के मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय को आगामी चुनावों में राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करना चाहते हैं।

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