छत्तीसगढ़

Assembly Session : सेवाग्राम परियोजना पर विधानसभा में गरमाई बहस, एक टिप्पणी से आमने सामने आए सत्ता और विपक्ष

विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को नवा रायपुर की सेवाग्राम परियोजना को लेकर माहौल अचानक (Assembly Session) गर्म हो गया। परियोजना पर हुए खर्च और इसके उद्देश्य को लेकर सदन में सवाल जवाब का दौर चला। चर्चा उस समय और तेज हो गई जब एक टिप्पणी पर सत्ता और विपक्ष के सदस्य आमने सामने आ गए।

सदन में कुछ देर तक तीखी नोकझोंक होती रही। विपक्ष ने टिप्पणी पर आपत्ति जताई तो सत्ता पक्ष ने अपने सवालों पर जवाब मांगा। माहौल गरमाने के बाद वक्ताओं ने अपनी बात स्पष्ट की और चर्चा आगे बढ़ी।

सेवाग्राम परियोजना पर मांगी गई जानकारी Assembly Session

भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने नवा रायपुर स्थित सेवाग्राम परियोजना की वित्तीय और भौतिक स्थिति को लेकर सवाल उठाया। इसके जवाब में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि 10 मार्च 2022 को इस परियोजना को मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य महात्मा गांधी के आत्मनिर्भर गांव की अवधारणा को बढ़ावा देना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और कारीगरों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।

सरकार ने खर्च का दिया ब्यौरा

वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि वर्ष 2022 23 से 2024 25 तक परियोजना के लिए कुल 129 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया। मल्टीपरपज डाइनिंग हॉल, सामुदायिक रसोई और प्रसाधन कक्ष के निर्माण पर 3 करोड़ 72 लाख रुपये खर्च हुए, जबकि अन्य निर्माण कार्यों पर 104 करोड़ 5 लाख रुपये व्यय किए गए। सरकार के अनुसार सेवाग्राम के सभी निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसके संचालन के लिए अभी अलग से कोई व्यवस्था स्वीकृत नहीं की गई है।

टिप्पणी पर बढ़ा विवाद Assembly Session

मंत्री के जवाब के बाद अजय चंद्राकर ने कहा कि एक व्यक्ति विशेष की स्वेच्छाचारिता के कारण इस परियोजना पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। इस टिप्पणी पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तत्काल आपत्ति जताई और इसका विरोध किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिससे कुछ समय के लिए सदन का माहौल गरमा गया।

बाद में जताया खेद

बहस के बाद अजय चंद्राकर ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना (Assembly Session) बनाना नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि उनके बयान से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए सदन में खेद व्यक्त करते हैं।

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