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Sawan Shivling Puja : सावन में शिवलिंग की पूजा का सही तरीका क्या है, जानिए कौन सी छोटी भूल पड़ सकती है भारी

सावन का महीना शुरू होते ही शहर से लेकर गांव तक शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई देने (Sawan Shivling Puja) लगी है। हाथों में जल, बेलपत्र और पूजा की थाली लेकर भक्त महादेव का अभिषेक करने पहुंच रहे हैं। मंदिरों में भक्ति का माहौल है और हर कोई पूरे विधि विधान से शिवलिंग की पूजा कर भगवान शिव का आशीर्वाद पाने की कामना कर रहा है।

इसी बीच कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर शिवलिंग की पूजा किस विधि से करनी चाहिए और किन बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। मान्यता है कि सावन में नियमपूर्वक जलाभिषेक और पूजन करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

शिवलिंग पूजा के लिए रखें ये जरूरी सामग्री

सावन में शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद, शक्कर और गन्ने का रस उपयोग किया (Sawan Shivling Puja) जा सकता है। यदि सभी सामग्री उपलब्ध न हो तो केवल जल से भी अभिषेक करना शुभ माना जाता है। पूजन के लिए बेलपत्र 3 या 11, धतूरा, भांग के पत्ते, शमी पत्र, आंकड़े के फूल, सफेद चंदन, भस्म, अक्षत, धूप, दीप, फल और मिठाई रखी जा सकती है।

ऐसे करें शिवलिंग का आसान पूजन Sawan Shivling Puja

शिवलिंग की पूजा सुबह करना श्रेष्ठ माना जाता है, लेकिन समय न मिलने पर शाम को भी अभिषेक (Sawan Shivling Puja) किया जा सकता है। सबसे पहले तांबे के लोटे से जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद इच्छा अनुसार पंचामृत से अभिषेक करें। यदि दूध, दही या पंचामृत चढ़ाया है तो अंत में फिर से जल अवश्य अर्पित करें।

पूरे अभिषेक के दौरान मन ही मन ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र (Sawan Shivling Puja) का जाप करते रहें। यदि घर में पूजा कर रहे हैं तो अभिषेक के बाद शिवलिंग को साफ कपड़े से पोंछकर सफेद चंदन और भस्म से त्रिपुंड लगाएं तथा अक्षत अर्पित करें।

इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, इत्र और आंकड़े के फूल अर्पित करें। यदि सारी सामग्री उपलब्ध नहीं है तो केवल बेलपत्र भी श्रद्धा से चढ़ाया जा सकता है। अंत में भोग लगाकर धूप दीप जलाएं, आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए भगवान शिव से क्षमा प्रार्थना करें।

पूजा के समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

शिवलिंग पर दूध चढ़ाते समय तांबे के बर्तन का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा हल्दी, सिंदूर और कुमकुम भी शिवलिंग पर अर्पित नहीं किए जाते।

तुलसी के पत्ते भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाने (Sawan Shivling Puja) चाहिए। वहीं शिवलिंग की पूरी परिक्रमा करने के बजाय आधी परिक्रमा करने की परंपरा मानी जाती है। जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है, उस स्थान को लांघना भी उचित नहीं माना जाता।

सावन में पूजा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान श्रद्धा और नियम के साथ शिवलिंग का जलाभिषेक, मंत्र जाप और पूजन करने से महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त सुख, शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना से पूरे महीने भगवान शिव की आराधना करते हैं।

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