संपादकीय

संपादकीय: कानून का पालन सख्ती से हो

Editorial: नीट पेपरलीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा शुरू किये गये आंदोलन पे जब राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूख अख्तियार कर लिया और विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना शुरू किया तब कहीं जाकर सरकार ने पेपरलीक मामले को गंभीरता से लिया है और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केबिनेट की बैठक में पेपरलीक संसोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई है।

प्रस्तावित नए कानून के मुताबिक पेपरलीक माफियांओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही का प्रावधान किया गया है और इस मामले में दोषी पाये जाने वाले लोगों को दस साल की सजा और दस करोड़ रूपये जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है ऐसे सभी मामलों की जल्द सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी गठन किया जाएगा जिसमें तीन महीने के भीतर मामले की सुनवाई कर फैसला किया जाएगा इसके साथ ही पेपरलीक मामले में दोषी पाये गये 47 अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। अब यह पेपरलीक संसोधन विधेयक संसद के मानसून सत्र में ही जल्द पेश किया जाएगा।

जिस तरह तमाम विपक्षी पार्टियां पेपरलीक मामले को लेकर आंदोलित हैं उसे देखते हुए इस कानून का संसद में पास होना लाजमी है। बशर्ते अब विपक्ष संसद में हंगामा करना बंद करे और इस नये कानून पर सदन में विस्तृत चर्चा करे। इस नये कानून को और कितना कड़ा तथा प्रभावी बनाया जा सकता है इस पर विपक्ष को भी खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए और सुझाव देने चाहिए ताकि पेपरलीक करने वाले माफियों की नाक में नकेल कसने के लिए यह कानून ज्यादा से ज्यादा सख्त हो और इसका धरातल पर सख्ती से पालन भी सुनिश्चित हो। दरअसल सरकारें अपराधों को रोकने के लिए कानून तो बना देती है और उसमें कड़ी सजा तथा भारी जुर्माने का प्रावधान भी कर देती है लेकिन ऐसे कानूनो ंका पालन करने की जिनपर जिम्मेदारी होती है वे इसकी अंदेखी करते हैं।

कहीं इस कानून का भ ऐसा ही हर्ष न हो और कड़ा कानून बन जाने के बाद भी अपराधी कानून की पकड़ से दूर न हो इसके लिए भी गंभीर चिंतन करने की आवश्यकता है। संसद में ही इस पर मनन और चिंतन किया जा सकता है। इसलिए विपक्ष को चाहिए कि यदि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर जिससे करोड़ो छात्राों का भविष्य जुड़ा हुआ है उस पर चर्चा करने के लिए वे सदन में जारी गतिरोध को तोड़़े। रही बात शिक्षक मंत्री धमेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की तो वह नये कानून पर शार्थक चर्चा के बाद भी की जा सकती है।

सरकार ने और खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर आंदोलनरत छात्रों को भरोसा दिलाया है कि नया कानून बन जाने से पेपरलीक मामलों पर रोक लगेगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कतई नहीं बख्शेगी। इस बीच सरकार कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं से भी लगातार चर्चा कर रही है और उनसे आंदोलन समाप्त करने की अपील कर रही है। उनकी तीन मांगो में से दो मांगो को सरकार ने स्वीकार्य भी कर ली है लेकिन वे भी विपक्षी पार्टियों की तरह केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धमेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अढ़े हुए हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार की इस पहल के बाद अब संसद में विस्तृत चर्चा के बाद इस समस्या का समाधान निकल जाएगा और कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा शुरू किया गया आंदोलन भी जल्द ही खत्म हो जाएगा।

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