Temple Donation : राम मंदिर में आखिर क्यों बदल दिए गए दान के नियम, नई व्यवस्था के पीछे सामने आई बड़ी वजह
अयोध्या में राम मंदिर की दान व्यवस्था को लेकर इन दिनों लगातार चर्चा (Temple Donation) बनी हुई है। श्रद्धालुओं के बीच भी नए बदलावों को लेकर उत्सुकता है। हाल के घटनाक्रम के बाद ट्रस्ट ने वित्तीय व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली में कई अहम फैसले लिए हैं, जिससे पूरे प्रबंधन में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
मंदिर परिसर में नई व्यवस्थाओं के लागू होने के बाद दान प्रक्रिया से जुड़े कई नियम बदल गए हैं। बैंक खातों के संचालन से लेकर दान पेटियों की सुरक्षा और नकदी की गिनती तक अब पहले से अधिक सख्त व्यवस्था लागू की गई है। इसी बीच कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे को लेकर भी नई जानकारियां सामने आई हैं।
बैंक खातों के संचालन में बड़ा बदलाव Temple Donation
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बैंक खातों के संचालन की प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब कार्यकारी महासचिव कृष्ण मोहन के साथ जगदीश और चंदन राय को भी अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बनाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी वित्तीय लेनदेन के लिए तीनों के संयुक्त हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। पहले बैंकिंग प्रक्रिया मुख्य रूप से ट्रस्टी अनिल मिश्रा के हस्ताक्षर से संचालित होती थी, जबकि कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी के डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग किया जाता था। ट्रस्ट का मानना है कि इससे वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी।
दान पेटी से गणना तक बढ़ाई गई सुरक्षा
दान व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई नए कदम उठाए (Temple Donation) गए हैं। दान की गणना वाले स्थान पर अब कुल 43 लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी ताकि पूरी प्रक्रिया पर कई स्तरों पर निगरानी रखी जा सके। इसके साथ ही 13 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जिन स्थानों पर पहले कैमरे नहीं थे, वहां भी निगरानी व्यवस्था शुरू कर दी गई है ताकि दान पेटी से नकदी की गिनती तक हर गतिविधि रिकॉर्ड हो सके।
सुरक्षा कर्मियों और पुलिस की बढ़ी तैनाती
नई व्यवस्था के तहत दान पेटियों से नकदी को गणना स्थल तक पहुंचाने के लिए 27 एसआईएस सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा पूरे मार्ग पर पुलिस बल की भी तैनाती की जाएगी।
विशेष रूप से पिलर संख्या 34 के आसपास अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे, क्योंकि वहां गुप्त दान पेटी रखी गई है। ट्रस्ट का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
इस्तीफों को लेकर सामने आई नई जानकारी
सूत्रों के अनुसार चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों के पीछे ट्रस्ट के नियमों का भी संबंध बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक यदि किसी पदाधिकारी या ट्रस्टी पर अनियमितता सिद्ध होती है तो ट्रस्ट के नियमों के अनुसार उसे पद से हटाया जा सकता है।
हालांकि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी पहले ही यह कह चुके हैं कि दोनों ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दिया है। इस संबंध में अंतिम स्थिति जांच और ट्रस्ट की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
पूछताछ में फर्जी रसीद का भी मामला आया सामने
जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह जानकारी भी सामने आई है कि कथित तौर पर कुछ श्रद्धालुओं से सीधे दान लेकर उन्हें फर्जी रसीदें दी जाती थीं। जांच एजेंसियों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नाम से छपी पुरानी कथित फर्जी रसीद बुक भी मिली है।
बताया जा रहा है कि ऑनलाइन रसीद व्यवस्था लागू होने के बाद कागजी फर्जी रसीदों का इस्तेमाल बंद हो गया। अब श्रद्धालु अधिकृत बैंक खाते या अधिकृत दान काउंटर के माध्यम से दान कर रहे हैं, जिससे ऐसी अनियमितताओं की संभावना काफी कम हुई है।
जांच अभी जारी
दान व्यवस्था से जुड़े पूरे मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर (Temple Donation) रही हैं और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। दूसरी ओर ट्रस्ट ने बैंकिंग प्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र में बदलाव कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना रोकने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।


