Russian Oil : तीन साल में सबसे ज्यादा रूसी तेल खरीद रहा भारत, आखिर अचानक क्यों बदली रणनीति
भारत ने एक बार फिर रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। जून महीने में आयात का स्तर तीन साल के सबसे ऊंचे आंकड़े पर पहुंचने (Russian Oil) जा रहा है। इस बदलाव ने ऊर्जा बाजार के साथ साथ वैश्विक रणनीति को लेकर भी नई चर्चा शुरू कर दी है कि आखिर भारत ने फिर से रूसी तेल पर भरोसा क्यों बढ़ाया।
पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव, वैश्विक आपूर्ति की अनिश्चितता और ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों के बीच भारत ने अपनी तेल खरीद की रणनीति में बदलाव किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सस्ती और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रूसी तेल आयात Russian Oil
कमोडिटी विश्लेषण से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में भारत रूस से प्रतिदिन करीब 23 लाख 50 हजार बैरल कच्चा तेल आयात करने जा रहा है। इससे पहले मई 2023 में प्रतिदिन 22 लाख बैरल आयात का रिकॉर्ड बना था। जून के शुरुआती तीन सप्ताह में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत से अधिक रही है।
क्यों बढ़ी रूस से तेल खरीद
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई अनिश्चितता के कारण भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति पर जोर बढ़ाया। इस समुद्री मार्ग से भारत के तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा (Russian Oil) आता है। आपूर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बाद भारत ने ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए रूस से अधिक मात्रा में तेल खरीदना शुरू किया।
सस्ता तेल भी बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले जैसी भारी छूट भले अब नहीं मिल रही हो, लेकिन रूसी कच्चा तेल अब भी अंतरराष्ट्रीय ब्रेंट क्रूड के मुकाबले प्रति बैरल लगभग चार से पांच डॉलर सस्ता पड़ता है। हालांकि इसकी ढुलाई और बीमा पर अतिरिक्त खर्च आता है, फिर भी कुल लागत कई मामलों में प्रतिस्पर्धी बनी रहती है।
भारत की ऊर्जा जरूरत में अहम भूमिका
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार रूस आने वाले समय में भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में बना रह सकता है, खासकर तब तक जब तक वैश्विक बाजार पूरी तरह स्थिर नहीं हो जाते।
ईरान और होर्मुज से भी मिली राहत
हाल के दिनों में ईरान से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही सामान्य होने के संकेतों से वैश्विक तेल बाजार को कुछ राहत (Russian Oil) मिली है। जानकारों का मानना है कि यदि आपूर्ति सामान्य बनी रहती है तो आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।



