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Government Schools : सरकारी स्कूलों में पहली बार आधे से कम छात्र, नीति आयोग की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर (Government Schools) दिए हैं। वर्षों से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगातार घट रही थी, लेकिन अब पहली बार स्थिति ऐसी बनी है कि आधे से भी कम छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था और लोगों के भरोसे दोनों पर बड़ी चर्चा छेड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्कूलों की संख्या बढ़ाना या भवन तैयार करना पर्याप्त नहीं है। परिवार अब बेहतर पढ़ाई, अनुशासन, तकनीक और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर अपने बच्चों के लिए दूसरे विकल्प चुन रहे हैं।

पहली बार 50 प्रतिशत से नीचे पहुंचा आंकड़ा Government Schools

नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2005 में देश के लगभग 71 प्रतिशत छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे। अब यह हिस्सा घटकर 49.24 प्रतिशत रह गया है। यानी पहली बार देश में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या आधे से भी कम हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह केवल नामांकन में बदलाव नहीं बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लोगों के घटते भरोसे का भी संकेत माना जा रहा है।

सीखने की गुणवत्ता बनी बड़ी चुनौती

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूलों की संख्या और सुविधाओं में सुधार के बावजूद सीखने के परिणाम अपेक्षित स्तर (Government Schools) तक नहीं पहुंच पाए हैं। कई छात्र उच्च कक्षाओं में पहुंचने के बाद भी बुनियादी पढ़ाई और सामान्य गणित के सवाल हल करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों और बेहतर शिक्षण पद्धति पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

माध्यमिक स्तर पर बढ़ रही पढ़ाई छोड़ने की समस्या

रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक स्तर पर नामांकन बेहतर बना रहता है, लेकिन माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं में पहुंचते ही पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़ जाती है। आर्थिक कठिनाइयां, स्कूलों की दूरी, परिवहन की समस्या और विशेष रूप से छात्राओं के लिए सुरक्षा तथा शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।

शिक्षकों और डिजिटल सुविधाओं की कमी

देश में छात्र शिक्षक अनुपात में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन कई ग्रामीण और दूरदराज के स्कूल आज भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार एक लाख से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं।

वहीं डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक तभी प्रभावी होगी जब मजबूत शिक्षक व्यवस्था और बुनियादी संसाधन भी उपलब्ध हों।

भरोसा लौटाना सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षित शिक्षकों, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और समुदाय के विश्वास के जरिए मजबूत (Government Schools) करना होगा। रिपोर्ट का निष्कर्ष यही है कि अब सबसे बड़ी चुनौती केवल बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा दोबारा कायम करने की है।

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