रवि उप्पल दुबई में गिरफ्तार, वानुअतु का पासपोर्ट भी नहीं आया काम

रायपुर। महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट के बहुचर्चित मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। ओमान से मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण के बाद, अब इस नेटवर्क के सह-संस्थापक और करोड़ों के हवाला लेनदेन के मास्टरमाइंड रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, अनौपचारिक माध्यमों से मिली इस जानकारी के बाद भारतीय एजेंसियां उसे भारत प्रत्यर्पित कराने की कानूनी औपचारिकताओं में जुट गई हैं। भिलाई के रहने वाले उप्पल की गिरफ्तारी के बाद अब छत्तीसगढ़ के उन नेताओं और नौकरशाहों की नींद उड़ना तय माना जा रहा है, जिनका नाम इस अवैध सिंडिकेट से जुड़ा था।
वानुअतु पासपोर्ट का पैंतरा फेल
भारत से भागने के बाद उप्पल और चंद्राकर दोनों ने प्रशांत महासागरीय देश ‘वानुअतु’ का पासपोर्ट हासिल कर लिया था, ताकि भारतीय एजेंसियों की जद से बच सकें। लेकिन एजेंसियों की रेड कॉर्नर नोटिस और अंतरराष्ट्रीय घेराबंदी के आगे यह रणनीति भी ढह गई।

उप्पल महादेव ऐप नेटवर्क का केवल सह-संस्थापक ही नहीं, बल्कि सैकड़ों करोड़ रुपये के हवाला ट्रांजेक्शन का मुख्य नियंत्रक था। वही तय करता था कि किसे कितना कमीशन और संरक्षण शुल्क पहुंचेगा।
छत्तीसगढ़ के ‘कनेक्शन’ और नेक्सस का होगा पर्दाफाश
ईडी अधिकारियों के अनुसार, पूरे सिंडिकेट में रवि उप्पल सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है उप्पल ही वह व्यक्ति था जो छत्तीसगढ़ के प्रभावशाली नेताओं, पुलिस अधिकारियों और नौकरशाहों के साथ संपर्क में रहता था और पूरा प्रोटेक्टिव नेटवर्क मेंटेन करता था। उप्पल से होने वाली पूछताछ से न केवल अवैध कमाई से फायदा उठाने वाले अंतिम चेहरों की पहचान होगी, बल्कि विदेशों में फैलाया गया ‘ब्लैक मनी ट्रेल’ भी पूरी तरह बेनकाब होगा।
प्रत्यर्पण प्रक्रिया में तेजी, यूएई से औपचारिक पुष्टि का इंतजार
अक्टूबर 2023 में रेड नोटिस जारी होने के बाद दिसंबर 2023 में भी उप्पल को दुबई में हिरासत में लिया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से वह रिहा हो गया था। इस बार ईडी और सीबीआई ने जनवरी 2024 में भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध और ओमान से चंद्राकर के प्रत्यर्पण के बाद अपनी पकड़ पूरी तरह मजबूत कर ली है।



