देश

Potato Farmers : आलू बेचकर लागत निकालना हुआ मुश्किल, मंडियों में किसानों को लग रहा बड़ा झटका

देश के कई हिस्सों में आलू की फसल बेचने पहुंचे किसानों के चेहरे इन दिनों चिंता से भरे दिखाई (Potato Farmers) दे रहे हैं। मंडियों में खरीदार तो मौजूद हैं, लेकिन भाव ऐसे मिल रहे हैं कि किसानों को लागत निकलने की उम्मीद भी कम नजर आ रही है। कई जगहों पर किसान बेहतर कीमत की आस में माल रोकने और भंडारण का विकल्प तलाश रहे हैं।

खेती में बढ़ती लागत, मजदूरी खर्च और परिवहन पर बढ़ते बोझ के बीच कम दाम किसानों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। हालात यह हैं कि कई मंडियों में आलू के भाव इतने नीचे आ गए हैं कि किसान अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिलने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में आलू की थोक कीमतों पर दबाव बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में तीनों राज्यों में सालाना आधार पर कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा गिरावट उत्तर प्रदेश में 54.8 प्रतिशत रही, जबकि पश्चिम बंगाल में 40.2 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 25.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

तीनों राज्यों में क्या है औसत भाव : Potato Farmers

जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में आलू की औसत थोक कीमत 524.85 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई। पश्चिम बंगाल में यह औसत 807.51 रुपये प्रति क्विंटल और मध्य प्रदेश में 724.87 रुपये प्रति क्विंटल रही। इन आंकड़ों से साफ है कि अधिकांश जगहों पर आलू का भाव 1,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे बना हुआ है, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है।

मध्य प्रदेश की मंडियों का हाल

मध्य प्रदेश की कई मंडियों में आलू के भाव सीमित दायरे में बने रहे। देवास मंडी में मॉडल कीमत 700 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई, जबकि होशंगाबाद में यह 440 रुपये प्रति क्विंटल रही।

अंबाह मंडी में किसानों को 500 रुपये प्रति क्विंटल का भाव (Potato Farmers) मिला। इंदौर में मॉडल कीमत 850 रुपये प्रति क्विंटल रही। हालांकि उज्जैन और पेटलावद जैसी कुछ मंडियों में कीमतें 1,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंचीं, लेकिन अधिकांश बाजारों में दबाव बना रहा।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा गिरावट

उत्तर प्रदेश में आलू उत्पादकों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। राज्य की औसत कीमत 524.85 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में काफी कम है।

आगरा, वजीरगंज, टुंडला और औरैया जैसी मंडियों में मॉडल कीमत 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज की गई। संभल में यह 406 रुपये और हसनपुर में 410 रुपये प्रति क्विंटल रही।

हालांकि कुछ मंडियों में बेहतर भाव भी देखने को मिले। झांसी, दोहरीघाट और मुगराबादशाहपुर में कीमतें 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचीं, जबकि खलीलाबाद में मॉडल कीमत 1,200 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई।

पश्चिम बंगाल में भी नहीं मिली राहत

देश के बड़े आलू उत्पादक राज्यों में शामिल पश्चिम बंगाल में भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। यहां सालाना आधार पर कीमतों में 40.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

बांकुरा, बक्सिरहाट, हल्दीबाड़ी और सिलीगुड़ी की मंडियों में मॉडल कीमत 720 से 760 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रही। झाड़ग्राम में 870 रुपये और दुर्गापुर में 880 रुपये प्रति क्विंटल का स्तर दर्ज किया गया।

कुछ बाजारों में अपेक्षाकृत बेहतर भाव मिले। बारासात मंडी में मॉडल कीमत 1,100 रुपये प्रति क्विंटल और हावड़ा में 1,000 रुपये प्रति क्विंटल रही, लेकिन अधिकांश मंडियों में कीमतें दबाव में ही बनी रहीं।

किसानों की बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक उत्पादन, बाजार में पर्याप्त आपूर्ति और मांग के मुकाबले उपलब्धता ज्यादा रहने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। दूसरी ओर खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे कम कीमत किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर बढ़ते खर्च के बीच किसानों का कहना है कि मौजूदा भाव पर लाभ कमाना मुश्किल हो गया है। कई किसानों को लागत निकालना भी कठिन लग रहा है।

आगे क्या रह सकती है स्थिति

बाजार जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में मांग और आपूर्ति की स्थिति के आधार पर कीमतों में कुछ बदलाव देखने को मिल (Potato Farmers) सकता है। हालांकि फिलहाल अधिकांश मंडियों में तेजी के संकेत मजबूत नहीं दिखाई दे रहे हैं।

जब तक बाजार में मांग में उल्लेखनीय सुधार नहीं होता या आपूर्ति का दबाव कम नहीं पड़ता, तब तक आलू उत्पादकों को राहत मिलने की संभावना सीमित नजर आ रही है। ऐसे में किसानों की नजर अब आने वाले हफ्तों के बाजार रुख पर टिकी हुई है।

Related Articles

Back to top button