
भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अभी से आक्रामक रणनीति पर काम शुरू (Mission Punjab BJP) कर दिया है। आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष और शिरोमणि अकाली दल की कमजोर होती पकड़ के बीच भाजपा अब पंजाब में अपने दम पर बड़ा राजनीतिक प्रयोग करने की तैयारी में है। इस पूरे अभियान की कमान हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सौंपी गई है।
राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर भाजपा ने पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य में मिशन की जिम्मेदारी नायब सैनी को ही क्यों दी? इसके पीछे भाजपा की सामाजिक, जातीय और राजनीतिक रणनीति को बेहद अहम माना जा रहा है।
पंजाब में BJP का नया सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला : Mission Punjab BJP
भाजपा इस बार पंजाब में पारंपरिक जट सिख राजनीति के मुकाबले गैर-जट ओबीसी, दलित और उच्च जाति हिंदू वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है। नायब सैनी ओबीसी समुदाय से आते हैं और पंजाब में सैनी समाज का अच्छा प्रभाव माना जाता है। उनकी मां गैर-जट सिख परिवार से हैं और वे धाराप्रवाह पंजाबी बोलते हैं। यही वजह है कि भाजपा उन्हें पंजाब में “बाहरी नेता” की बजाय स्थानीय जुड़ाव वाले चेहरे के रूप में पेश कर रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा “हरियाणा मॉडल” को पंजाब में दोहराना चाहती है। हरियाणा में गैर-जट सामाजिक गठबंधन के जरिए भाजपा ने सत्ता हासिल की थी और अब वही फॉर्मूला पंजाब में लागू करने की कोशिश की जा रही है।
लगातार पंजाब दौरे कर रहे हैं सैनी
2025 से नायब सैनी लगातार पंजाब का दौरा कर रहे हैं और 2026 में उनकी सक्रियता और बढ़ गई है। वे अब तक कई गुरुद्वारों में मत्था टेक चुके हैं और अलग-अलग समुदायों के कार्यक्रमों में शामिल होकर जमीनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।
भाजपा के पास फिलहाल पंजाब विधानसभा में सिर्फ दो सीटें हैं और लोकसभा में भी उसका कोई सांसद नहीं है। बावजूद इसके पार्टी 2027 में सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
भगवंत मान सरकार पर लगातार हमलावर
नायब सैनी पंजाब में कानून-व्यवस्था, नशा, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान पर लगातार हमला बोल रहे हैं। भाजपा उन्हें राज्य में “विकल्प” के रूप में पेश (Mission Punjab BJP) कर रही है।
सैनी अपने भाषणों में बार-बार “हरियाणा जैसा सुशासन” पंजाब में लागू करने का दावा कर रहे हैं। भाजपा का मानना है कि अगर गैर-जट वोटों का ध्रुवीकरण हुआ तो पार्टी पहली बार पंजाब में बड़ी ताकत बन सकती है।
अकाली दल से अलग होने के बाद नया प्रयोग
भाजपा लंबे समय तक पंजाब में अकाली दल की जूनियर पार्टनर रही, लेकिन किसान आंदोलन के बाद दोनों दलों का गठबंधन टूट गया। अब भाजपा पंजाब में अपने संगठन और नेतृत्व के दम पर नई राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहती है।
2024 लोकसभा चुनाव में भले भाजपा कोई सीट नहीं जीत सकी, लेकिन पार्टी को मिले करीब 19 प्रतिशत वोट शेयर ने नेतृत्व का आत्मविश्वास बढ़ाया है। भाजपा को लगता है कि अगर वह ओबीसी, दलित और शहरी हिंदू वोट बैंक को साथ लाने में सफल रही तो पंजाब की राजनीति में बड़ा उलटफेर संभव है।
पंजाब प्रोजेक्ट’ का चेहरा हैं सैनी
राजनीतिक जानकारों के अनुसार नायब सैनी केवल चुनाव प्रचार करने वाले नेता नहीं, बल्कि भाजपा के “मिशन पंजाब” का केंद्रीय चेहरा बन चुके हैं। पार्टी उन्हें ऐसे नेता के रूप में पेश कर रही है जो सिख और हिंदू दोनों समुदायों से सहज संवाद स्थापित कर सकते हैं।
भाजपा का यह प्रयोग कितना सफल होगा, यह आने वाला समय तय करेगा, लेकिन इतना साफ है कि पार्टी अब पंजाब को सहयोगी दलों के भरोसे छोड़ने के मूड में नहीं है और 2027 के चुनाव को बड़े राजनीतिक मिशन की तरह लड़ने की तैयारी कर रही है।



