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Kharif Crop : कम बारिश से खेती पर संकट, खरीफ की बुवाई पिछड़ी, जलाशयों में भी घटा पानी, अब जुलाई से बड़ी उम्मीद

देश में मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा (Kharif Crop) दी है। जून महीने में सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। इसका असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी साफ दिखाई देने लगा है और किसान अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

खेती के साथ जलाशयों में पानी का स्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। हालांकि कुछ राज्यों में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, लेकिन पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई हिस्सों में पानी का भंडार तेजी से घटा है। अब उम्मीद जुलाई में होने वाली बारिश पर टिकी हुई है।

जून में 33 फीसदी कम हुई बारिश Kharif Crop

29 जून तक देश में सामान्य से करीब 33 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ सीजन पर पड़ा है। 25 जून तक खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में करीब 23 प्रतिशत पीछे चल रही है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण किसान धान, सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई शुरू करने से बच रहे हैं।

देश के बांधों में भी घटा पानी

केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में इस समय 50.457 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मौजूद है, जो उनकी कुल भंडारण क्षमता का 27.49 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में इन जलाशयों में 58.249 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी था। हालांकि वर्तमान जल भंडारण पिछले 10 वर्षों के औसत से थोड़ा बेहतर बताया गया है।

मध्य भारत और उत्तर में राहत

रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों वाले मध्य क्षेत्र के जलाशयों में क्षमता का 33.77 प्रतिशत पानी उपलब्ध है वहीं हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान सहित उत्तरी राज्यों में जलाशयों का जलस्तर 33.17 प्रतिशत तक पहुंचा है। इन दोनों क्षेत्रों की स्थिति पिछले वर्ष और दीर्घकालिक औसत की तुलना में बेहतर मानी जा रही है।

पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में बढ़ी चिंता

पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में जलाशयों में केवल 20.89 प्रतिशत पानी बचा है। दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां जलाशयों में केवल 21.34 प्रतिशत पानी शेष है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है।

कुछ नदी बेसिन में पर्याप्त, कुछ में कमी

गंगा, सिंधु, नर्मदा, तापी, माही, साबरमती, गोदावरी और महानदी नदी बेसिन में पानी का भंडार सामान्य से बेहतर (Kharif Crop) बना हुआ है। वहीं कावेरी नदी बेसिन और महानदी तथा पेन्नार के बीच की पूर्वी नदियों वाले क्षेत्रों में पानी की कमी बनी हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

जुलाई की बारिश पर टिकी उम्मीद

मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में मानसून फिर सक्रिय होने की संभावना है। गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के शेष हिस्सों में अच्छी बारिश का अनुमान जताया गया है।

इसके अलावा कोंकण, गोवा और महाराष्ट्र में भी भारी वर्षा की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के पहले पखवाड़े में अच्छी बारिश होती है, तो खरीफ फसलों की बुवाई में हुई शुरुआती देरी की काफी हद तक भरपाई हो सकती है।

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