आज से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ, समृद्धि के गज पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, देवी मंदिरों में तैयारियां पूरी

बिलासपुर। पितृपक्ष की विदाई के साथ ही अब पूरा अंचल मां दुर्गा की आराधना में लीन होने को तैयार है। रविवार से शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होगा। नौ दिनों तक देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना, जसगीत, भजन-कीर्तन और जवारा की धूम रहेगी। रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर में इस बार 30 हजार मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करने की तैयारी की गई है। वहीं, शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक दुर्गा पूजा पंडालों और देवी स्थलों में श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है। हाथी को सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और भरपूर फसल का प्रतीक माना जाता है। घट स्थापना के साथ शुरू होने वाला यह पर्व जहां भक्तों को देवी आराधना का अवसर देगा, वहीं बाजारों में भी त्योहारों की रौनक बढ़ाएगा।
महामाया मंदिर में अभिजीत मुहूर्त में होगी पूजा
रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर में नवरात्र के पहले दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 10.51 बजे से अभिजीत मुहूर्त में पूजन प्रारंभ होगा। इस दौरान धूप परिक्रमा, घट स्थापना और देवी षोडशोपचार पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे। घट स्थापना के लिए सुबह 11.36 बजे से दोपहर 12.24 बजे तक का मुहूर्त निर्धारित बताया गया है।
मंदिर में 30 हजार मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करने की तैयारी है। नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर परिसर में व्यवस्थाएं की गई हैं। नौ दिनों तक मंदिर में माता की आराधना और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी रहेगा।
प्रमुख देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन की तैयारी पूरी
नवरात्र को लेकर बिलासपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों के प्रमुख देवी मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मां महामाया मंदिर रतनपुर के अलावा काली मंदिर तिफरा, पुलिस लाइन दुर्गा मंदिर, महामाया मंदिर बैमा नगोई, डिडिनेश्वरी देवी मंदिर मल्हार, मां मावली देवी धाम बिरकोना, सतबहिनिया मंदिर बंधवापारा, दुर्गा मंदिर जरहाभाठा और बगदाई मंदिर अशोकनगर सरकंडा सहित अन्य देवी स्थलों में पूजा-अर्चना की विशेष व्यवस्था की गई है।
नवरात्र के दौरान इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ेगी। घरों और मंदिरों में घट स्थापना के साथ देवी की आराधना होगी। कई स्थानों पर जसगीत, भजन-कीर्तन और जवारा के आयोजन होंगे, जबकि शाम के समय डांडिया सहित अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों से माहौल भक्तिमय रहेगा।
पितृपक्ष समाप्त, अब बाजारों में बढ़ेगी रौनक
शनिवार, 10 अक्टूबर को पितृमोक्ष अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन हुआ। पखवाड़े भर चले श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पितरों को विदाई दी। अब नवरात्र के साथ ही बाजारों में भी खरीदारी का दौर तेज होने की उम्मीद है।
पितृपक्ष के दौरान परंपरागत मान्यताओं के चलते कई परिवार मांगलिक कार्यों और नई वस्तुओं की खरीदारी से परहेज करते हैं। नवरात्र शुरू होने के साथ पूजा सामग्री, फल-फूल, वस्त्र, आभूषण और घरों की सजावट से जुड़े सामानों की मांग बढ़ सकती है। देवी आराधना के साथ त्योहारों के मौसम की चहल-पहल भी दिखाई देने लगेगी।
अरपा के घाटों पर पितरों को किया गया तर्पण
पितृमोक्ष अमावस्या पर बिलासपुर के विभिन्न घाटों पर पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करने के लिए श्रद्धालु पहुंचे। अरपा घाट, पुराना पुल सरकंडा, पचरीघाट, शिवघाट, मंगला और तोरवा सहित कई स्थानों पर धार्मिक गतिविधियां हुईं।
श्रद्धालुओं ने पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान कर पारंपरिक पकवानों का अर्पण किया। पूड़ी, बड़ा, बोबरा और चीला सहित विभिन्न पकवान अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित किया गया और आरती की गई। जिन परिजनों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए पितृमोक्ष अमावस्या पर श्राद्ध करने की परंपरा है। धार्मिक विधियां पूरी करने के बाद लोगों ने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
पितृपक्ष की समाप्ति और नवरात्र के आगमन के साथ ही अब अंचल में भक्ति और उत्सव का माहौल बनने लगा है। अगले नौ दिनों तक देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की धूम रहने की उम्मीद है।




