Green Urea : खेती में आने वाला है बड़ा बदलाव, ग्रीन यूरिया के लिए सरकार का बड़ा कदम, बनेगा देश का पहला पायलट प्लांट
देश में खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम (Green Urea) उठाया है। अब ग्रीन यूरिया के उत्पादन को बढ़ावा देने की तैयारी तेज हो गई है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को भविष्य में स्वच्छ तकनीक से तैयार उर्वरक उपलब्ध कराना और विदेशों से होने वाले आयात पर निर्भरता कम करना है।
सरकार का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल होती है तो आने वाले वर्षों में भारत उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। इसी कड़ी में देश का पहला ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट आंध्र प्रदेश में स्थापित किया जाएगा।
आंध्र प्रदेश में बनेगा पहला पायलट प्लांट Green Urea
योजना के तहत आंध्र प्रदेश के पुडिमदाका में प्रतिदिन 150 टन क्षमता वाला ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना को एनटीपीसी की अनुसंधान इकाई नेट्रा विकसित करेगी।
इस प्लांट में कार्बन कैप्चर और उपयोग तकनीक के साथ पानी से हाइड्रोजन तैयार करने वाली आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसे भविष्य के बड़े ग्रीन यूरिया संयंत्रों के लिए मॉडल परियोजना माना जा रहा है।
ग्रीन अमोनिया पर चल रहा परीक्षण
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पिछले रबी सीजन से ग्रीन अमोनिया के उपयोग का विभिन्न फसलों पर परीक्षण कर रही है। धान, तिलहन और गन्ना जैसी प्रमुख फसलों में इसके प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। इन परीक्षणों का उद्देश्य यह जानना है कि ग्रीन अमोनिया पारंपरिक उर्वरकों जितना प्रभावी है या नहीं।
कई बड़ी कंपनियां आईं साथ
हाल ही में उर्वरक विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में एनटीपीसी, सेकी, प्रमुख उर्वरक निर्माता कंपनियां, तकनीकी संस्थान और इलेक्ट्रोलाइजर निर्माता शामिल हुए। बैठक में ग्रीन यूरिया उत्पादन, निवेश और तकनीकी विकास पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्रालय का मानना है कि उद्योग जगत की बढ़ती रुचि इस क्षेत्र के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।
सरकार देगी आर्थिक सहयोग
ग्रीन ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार अलग अलग मंत्रालयों के माध्यम से वित्तीय सहायता देने की तैयारी कर रही है। योजना के तहत ग्रीन अमोनिया को उर्वरक उत्पादन प्रणाली से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि भविष्य में किसानों को इसकी उपलब्धता आसान हो सके।
आयात पर निर्भरता होगी कम
भारत हर साल बड़ी मात्रा में यूरिया का आयात करता है। वर्ष 2025-26 में देश ने करीब 100 लाख टन यूरिया विदेशों (Green Urea) से खरीदा था। सरकार का मानना है कि ग्रीन यूरिया उत्पादन बढ़ने से आयात में कमी आएगी और देश की विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।
पर्यावरण को भी मिलेगा फायदा
ग्रीन यूरिया उत्पादन में कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाएगा, जिसे ताप विद्युत संयंत्र, सीमेंट और स्टील उद्योगों से एकत्र किया जाएगा। इस तकनीक से प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा (Green Urea) मिलेगा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में भी इस परियोजना का योगदान सुनिश्चित करना है।
किसानों के लिए क्यों है अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रीन यूरिया उत्पादन सफल रहता है तो भविष्य में किसानों को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही उर्वरकों की आपूर्ति मजबूत होगी और देश की कृषि व्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।



