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Electricity Tariff : अब हर महीने बढ़ेगा बिजली का बिल, नए फैसले से उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता

दिल्ली की भीषण गर्मी के बीच बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने (Electricity Tariff) आई है। नए आदेश के बाद अब बिजली बिल को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई परिवार यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में उनकी जेब पर इसका कितना असर पड़ सकता है।

राजधानी में बिजली की बढ़ती खपत के बीच यह फैसला ऐसे समय आया है जब लोग पहले से ही गर्मी और बढ़े हुए खर्चों का सामना कर रहे हैं। बिजली उपभोक्ताओं के बीच नए नियम को लेकर उत्सुकता और चिंता दोनों देखने को मिल रही है।

अब हर महीने लगेगा अतिरिक्त शुल्क : Electricity Tariff

नए आदेश के बाद बिजली वितरण कंपनियां अब हर महीने पीपीएसी शुल्क उपभोक्ताओं से वसूल सकेंगी। पहले यह प्रक्रिया तिमाही आधार पर होती थी, लेकिन अब इसकी गणना और वसूली मासिक रूप से की जाएगी।

इस बदलाव का असर अलग अलग क्षेत्रों में अलग तरीके से दिखाई देगा, क्योंकि राजधानी में कार्यरत तीनों बिजली वितरण कंपनियों के लिए दरें अलग निर्धारित की गई हैं।

किस इलाके में कितना असर

टाटा पावर के उपभोक्ताओं को बिजली बिल में करीब 1 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। वहीं अन्य दो वितरण क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को लगभग 2.5 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत तक अधिक बिल चुकाना पड़ सकता है। यह बढ़ोतरी बिजली उपयोग और क्षेत्र के आधार पर अलग अलग होगी।

क्या है नया आदेश

बिजली नियामक आयोग ने अप्रैल 2026 के लिए बिजली खरीद समायोजन शुल्क की वसूली की अनुमति (Electricity Tariff) दी है। यह पहली बार है जब राजधानी में इस तरह का मासिक आदेश लागू किया गया है।

आदेश के तहत विभिन्न वितरण कंपनियों को निर्धारित सीमा तक अतिरिक्त शुल्क वसूलने की मंजूरी दी गई है ताकि बिजली खरीद लागत में आई बढ़ोतरी की भरपाई की जा सके।

पीपीएसी क्यों लिया जाता है

पीपीएसी वह व्यवस्था है जिसके जरिए बिजली खरीद की लागत में होने वाले बदलाव को उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है। कोयला, ईंधन और बिजली उत्पादन से जुड़ी लागत बढ़ने पर इसका असर इसी माध्यम से बिलों (Electricity Tariff) में जोड़ा जाता है। देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह व्यवस्था पहले से लागू है और बिजली क्षेत्र के नियमों के तहत इसे मान्यता प्राप्त है।

किन उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर

सरकारी सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को इस बदलाव से राहत मिलेगी। जिन परिवारों को यूनिट आधारित सब्सिडी मिलती है, उनके लिए अतिरिक्त शुल्क का सीधा असर नहीं माना जा रहा है। हालांकि ज्यादा बिजली उपयोग करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और गैर सब्सिडी श्रेणी के उपभोक्ताओं को अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है।

क्यों लिया गया यह फैसला

बताया जा रहा है कि अप्रैल 2026 के दौरान कोयला और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी। इसके साथ ही बिजली खरीद की लागत भी काफी (Electricity Tariff) बढ़ गई थी। इसी बढ़े हुए खर्च को संतुलित करने और बिजली वितरण कंपनियों पर वित्तीय दबाव कम करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। आने वाले महीनों में भी इसी आधार पर मासिक समायोजन जारी रह सकता है।

 

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