एडवांस लेकर भी काटा कनेक्शन, एयरटेल पर जुर्माना
रायपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल लिमिटेड को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराते हुए उपभोक्ता को राहत देने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को 5,700 रुपए की जमा राशि परिवाद दायर करने की तारीख से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक कष्ट के लिए 5 हजार और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपए का भुगतान करने को कहा गया है।
मामला रायपुर निवासी राहुल जैन से जुड़ा है। उन्होंने 27 जून 2016 को एयरटेल के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया था। परिवाद के मुताबिक राहुल जैन ने एयरटेल के एडवांस रेंटल प्लान के तहत छह महीने के ब्रॉडबैंड इंटरनेट के लिए 5,700 रुपए का एकमुश्त भुगतान किया था।
इसके बावजूद कंपनी ने उन्हें उनकी पसंद का नंबर उपलब्ध नहीं कराया। बाद में बिल में 99 रुपए का मासिक शुल्क और नंबर बदलने के नाम पर 250 रुपए का अतिरिक्त शुल्क जोड़ दिया गया। उपभोक्ता ने इन अतिरिक्त शुल्कों को अनुचित मानते हुए भुगतान नहीं किया। इसके बाद कंपनी ने इंटरनेट कनेक्शन काट दिया।
एग्रीमेंट पेश नहीं कर सकी कंपनी
मामले की सुनवाई अध्यक्ष डाकेश्वर प्रसाद शर्मा, सदस्य निरूपमा प्रधान और अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने की। आयोग ने पाया कि कंपनी एडवांस रेंटल योजना से संबंधित कोई कस्टमर एग्रीमेंट फार्म पेश नहीं कर सकी। आयोग ने माना कि छह महीने की पूरी राशि पहले ही लेने के बाद अतिरिक्त शुल्क लगाकर इंटरनेट सेवा बंद करना सेवा में कमी है।
45 दिन में करना होगा भुगतान
आयोग ने एयरटेल को अंतिम आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को 5,700 रुपए की मूल जमा राशि लौटाने का निर्देश दिया है। इस राशि पर परिवाद दायर करने की तारीख से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके साथ ही मानसिक कष्ट के लिए 5,000 रुपए और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपए का भुगतान करना होगा।
उपभोक्ताओं के लिए भी अहम फैसला
आयोग के इस आदेश से यह स्पष्ट हुआ है कि एडवांस रेंटल योजना में पूरी राशि लेने के बाद सेवा प्रदाता मनमाने ढंग से अतिरिक्त शुल्क लगाकर सेवा बाधित नहीं कर सकता। आयोग ने मामले में कंपनी की ओर से शर्तों से संबंधित दस्तावेज पेश नहीं किए जाने को भी महत्वपूर्ण माना।



