छत्तीसगढ़

त्योहारी सीजन में भी रियल एस्टेट का कारोबार मंदा, प्रदेश में 300 करोड़ के कारोबार का अनुमान

रायपुर। त्योहारी सीजन में जहां सराफा, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ा बाजार में जमकर खरीदारी हो रही है, वहीं रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी का असर बना हुआ है। नवरात्रि से दीपावली तक आमतौर पर मकान और प्लॉट की बिक्री में तेजी आती है, लेकिन इस बार बाजार अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। पुष्य नक्षत्र जैसे शुभ अवसर पर भी प्रदेशभर में मकान और प्लॉट की बिक्री सीमित रही। बिल्डरों के मुताबिक, दीपावली तक प्रदेश में रियल एस्टेट का कारोबार करीब 300 करोड़ रुपए तक ही रहने की संभावना है।

इस बार बड़े और लग्जरी प्रीमियम मकानों के साथ बड़े प्लॉट की बिक्री की उम्मीद अधिक है, जबकि छोटे मकानों और बजट वाले घरों के खरीदार कम मिल रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह महंगाई को माना जा रहा है। मध्यम वर्गीय परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित होने के कारण वे नया मकान खरीदने का फैसला टाल रहे हैं। इसका सीधा असर छोटे मकानों की बिक्री पर पड़ रहा है।

पुष्य नक्षत्र पर भी 40 से 50 करोड़ की बिक्री

त्योहारी सीजन में आमतौर पर रियल एस्टेट सेक्टर में हजार करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होता रहा है। पिछले साल भी मंदी के कारण मकान और प्लॉट की बिक्री कम रही थी और कारोबार 300 करोड़ रुपए से नीचे सिमट गया था। उम्मीद थी कि इस बार बाजार में सुधार होगा, लेकिन बिल्डरों के अनुसार स्थिति में खास बदलाव नहीं आया है।

पुष्य नक्षत्र पर जहां प्रदेश के बाजारों में एक ही दिन में दो हजार करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार हुआ, वहीं रियल एस्टेट में मुश्किल से 40 से 50 करोड़ रुपए के मकान और प्लॉट बिक पाए। बिल्डर शैलेश वर्मा के अनुसार, महंगाई के कारण मध्यम वर्ग के परिवारों का बजट बिगड़ गया है। ऐसे में उनके लिए मकान खरीदने का निर्णय लेना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि इस बार छोटे और मध्यम बजट के मकानों की बिक्री सीमित रहने की संभावना है।

प्रीमियम मकानों की बिक्री से मिलेगी राहत

बिल्डरों के मुताबिक, एक करोड़ रुपए से अधिक कीमत वाले प्रीमियम मकानों की बिक्री पर मंदी का ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है। इस श्रेणी के मकान मुख्य रूप से उच्च आय वर्ग के खरीदारों की पसंद हैं। आर्थिक रूप से सक्षम खरीदारों के कारण लग्जरी और प्रीमियम श्रेणी में कारोबार जारी रहने की उम्मीद है।

इसके अलावा बड़े प्लॉट की मांग भी बनी रह सकती है। हालांकि, छोटे मकानों और कम कीमत वाले प्लॉट की बिक्री कमजोर रहने से कुल कारोबार में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।

निजी और सरकारी योजनाओं में भी खरीदारों की कमी

प्रदेशभर में रियल एस्टेट की योजनाओं की कमी नहीं है। निजी बिल्डरों की ओर से कई आवासीय परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा सरकारी आवास योजनाएं भी उपलब्ध हैं। इसके बावजूद सरकारी मकानों को भी अपेक्षित खरीदार नहीं मिल रहे हैं।

बिल्डरों का अनुमान है कि इस बार नवरात्रि से दीपावली तक सभी सेक्टरों को मिलाकर प्रदेश में करीब 15 हजार करोड़ रुपए का कारोबार हो सकता है। इसमें रियल एस्टेट की हिस्सेदारी काफी कम रहने की संभावना है। इस तरह त्योहारी खरीदारी के माहौल के बावजूद प्रॉपर्टी बाजार में मंदी का असर साफ नजर आ रहा है।

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