छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Monsoon : छत्तीसगढ़ में अब भी मेहरबान नहीं हुआ मानसून, जुलाई के पहले हफ्ते में बदल सकता है मौसम का मिजाज

छत्तीसगढ़ में मानसून पहुंचने के बावजूद कई जिलों में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं (Chhattisgarh Monsoon) हो सकी है। खेतों में अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे किसानों की चिंता बढ़ने लगी है, जबकि उमस और गर्मी ने लोगों की परेशानी भी बढ़ा दी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में हालात बदल सकते हैं।

मौसम विभाग के अनुसार देश के कई हिस्सों की तरह छत्तीसगढ़ में भी मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी हुई है। हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में बनने वाली नई मौसम प्रणाली के असर से प्रदेश में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है।

देशभर में सामान्य से कम बारिश Chhattisgarh Monsoon

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 4 जून से 26 जून के बीच देश में सामान्य से करीब 45 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। सैटेलाइट तस्वीरों में भी मध्य और पश्चिम भारत के बड़े हिस्सों में घने बारिश वाले बादल नहीं दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यही वजह है कि कई राज्यों के साथ छत्तीसगढ़ में भी मानसून की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं।

क्यों थम गई बारिश

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में अब तक मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया है। आमतौर पर यही मौसम प्रणालियां समुद्र से नमी लेकर मध्य भारत तक पहुंचती हैं और व्यापक बारिश कराती हैं। इन प्रणालियों के कमजोर रहने से छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बारिश की रफ्तार धीमी बनी हुई है।

जुलाई के पहले सप्ताह में राहत की उम्मीद

मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले चार से सात दिनों के भीतर बंगाल की खाड़ी में नया मौसम तंत्र विकसित (Chhattisgarh Monsoon) हो सकता है। इसके मजबूत होने पर नमी की मात्रा बढ़ेगी और मध्य भारत में मानसून फिर सक्रिय हो सकता है। इसका असर छत्तीसगढ़ पर भी पड़ने की संभावना है। यदि यह प्रणाली मजबूत होती है तो प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

किसानों की नजर अब अगले सप्ताह पर

प्रदेश में धान की बुवाई का समय चल रहा है। ऐसे में किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले तीन दिनों में छत्तीसगढ़ समेत मध्य भारत के कई हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन सकती हैं।

यदि अनुमान सही साबित होता है तो जुलाई के पहले सप्ताह से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने (Chhattisgarh Monsoon) की उम्मीद है, जिससे खेती और जलस्रोतों दोनों को राहत मिल सकती है।

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