CG Semi : 7,500 करोड़ का निवेश और 4 अरब चिप्स क्षमता, साणंद में आकार ले रहा भारत का मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम
भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण (CG Semi) को नई गति मिल रही है। केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों तथा उद्योग जगत के सहयोग से गुजरात के साणंद में स्थापित हो रही सीजी सेमी की दो विनिर्माण इकाइयों में करीब 7,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। दोनों संयंत्र पूरी क्षमता से शुरू होने के बाद प्रतिवर्ष लगभग 4 अरब सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करेंगे। यह जानकारी सीजी सेमी के चेयरमैन कार्यालय के वाइस प्रेसिडेंट संदीप कुमार सेन ने छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के अध्ययन दौरे के दौरान दी।
भारत बन रहा सेमीकंडक्टर निर्माण का नया केंद्र CG Semi
संदीप कुमार सेन ने बताया कि भारत पहले से ही वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन का लगभग 20 प्रतिशत कार्य कर रहा है। अब देश विनिर्माण क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक, कुशल मानव संसाधन और मजबूत सप्लाई चेन सेमीकंडक्टर उद्योग की सबसे बड़ी ताकत हैं।

जापान की कंपनी से तकनीकी साझेदारी
उन्होंने बताया कि सीजी सेमी (CG Semi) ने जापान की प्रतिष्ठित कंपनी रेनेसास (Renesas) के साथ तकनीकी साझेदारी की है। कंपनी मुख्य रूप से चिप डिजाइन, असेंबली और टेस्टिंग के क्षेत्र में काम कर रही है। कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने के लिए उन्हें साझेदार कंपनियों में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
दो फैक्ट्रियों में होगा उत्पादन
साणंद में करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थापित दोनों इकाइयों (CG Semi) के लिए लगभग एक लाख वर्गमीटर क्षेत्र का उपयोग किया जा रहा है। इनमें 40 हजार वर्गमीटर क्षेत्र अत्याधुनिक क्लीन रूम के रूप में विकसित किया गया है। संदीप सेन ने बताया कि सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए धूल रहित और पूरी तरह नियंत्रित वातावरण जरूरी होता है, इसलिए यहां विशेष सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का पालन किया जाता है।
सरकार दे रही 70 प्रतिशत तक सहायता CG Semi
उन्होंने बताया कि परियोजना (CG Semi) के लिए केंद्र सरकार करीब 50 प्रतिशत और गुजरात सरकार लगभग 20 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (GIDC) की प्लग-एंड-प्ले सुविधा, सिंगल विंडो सिस्टम तथा पानी, बिजली और गैस जैसी आधारभूत सुविधाएं उद्योगों की स्थापना को आसान बना रही हैं।
निर्बाध बिजली और शुद्ध पानी सबसे बड़ी जरूरत
सेमीकंडक्टर उद्योग में बिजली की गुणवत्ता को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए सेन ने कहा कि वोल्टेज में मामूली उतार-चढ़ाव भी उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उन्नत विद्युत प्रणाली और यूपीएस जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं। साथ ही बड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले शुद्ध पानी की भी आवश्यकता होती है।

आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी
उन्होंने बताया कि वर्तमान में कई विशेष रसायन, उपकरण और कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता है। हालांकि गुजरात के धोलेरा क्षेत्र में विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के जरिए देश में सप्लाई चेन मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।

ऑटोमोबाइल और IoT सेक्टर पर फोकस
सीजी सेमी के मानव संसाधन प्रमुख जोसेफ प्रेमराज ने बताया कि कंपनी ऑटोमोटिव, औद्योगिक और IoT सेक्टर के लिए सेमीकंडक्टर उत्पाद तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत के इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ नई तकनीक को तेजी से सीखने में सक्षम हैं और यही देश की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार की नीतियों, वैश्विक तकनीकी साझेदारी और कुशल मानव संसाधन के दम पर भारत जल्द ही वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण मानचित्र पर मजबूत पहचान बनाएगा।



