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CEC Gyanesh Kumar: 13 करोड़ वोटर लिस्ट से बाहर? मुख्य चुनाव आयुक्त को सस्पेंड करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला!

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) को तत्काल निलंबित करने की मांग वाली याचिकाओं पर कोई भी एकतरफा (ex-parte) अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बिना प्रतिवादियों का पक्ष सुने केवल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर ऐसा कदम नहीं उठाया जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग (ECI) और CEC सहित अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

किसे जारी हुए नोटिस:

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, ECI, CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू व डॉ. विवेक जोशी, डिप्टी चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और DG (IT) सीमा खन्ना से जवाब तलब किया है।

याचिकाओं में लगाए गए गंभीर आरोप

यह सुनवाई ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट (CEC Gyanesh Kumar) के आधार पर दायर याचिकाओं (राकेश कुमार सिंह और शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा) पर हो रही थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह और मेनका गुरुस्वामी ने अदालत के समक्ष निम्नलिखित दावे पेश किए ।

  • 14 एकतरफा फैसले: आरोप है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े 14 महत्वपूर्ण फैसले अकेले लिए, जो CEC Act की धारा 18 (सर्वसम्मति या बहुमत से निर्णय) का उल्लंघन है।
  • 13 करोड़ नाम हटाने का दावा: याचिका में दावा किया गया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से लगभग 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं।
  • मुख्य मांगें: CEC का तत्काल निलंबन, कथित 14 फैसलों को रद्द करना, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में SIT जांच, ECINet और ERONet डेटाबेस का फोरेंसिक ऑडिट, और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

निलंबन की मांग पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट (CEC Gyanesh Kumar) ने कई व्यावहारिक और कानूनी सवाल उठाए:

  • “चुनाव कौन कराएगा?”: जब याचिकाकर्ता के वकील ने स्थिति की गंभीरता का हवाला देकर CEC को तुरंत निलंबित करने की मांग की, तो पीठ ने सवाल किया कि यदि उन्हें हटा दिया गया, तो आयोग का कामकाज कौन संभालेगा और चुनाव कौन करवाएगा।
  • केवल अखबार की रिपोर्ट पर आदेश नहीं: CJI सूर्यकांत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय सिर्फ समाचार पत्रों की रिपोर्ट्स के आधार पर इतना बड़ा आदेश पारित नहीं कर सकता।
  • जवाब का इंतजार: जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया कि यदि रिकॉर्ड से साबित होता है कि फैसले सर्वसम्मति से नहीं लिए गए थे, तो अदालत उन निर्णयों को ‘अधिकारातीत’ (ultra vires) घोषित कर निरस्त कर सकती है। हालांकि, ऐसा करने से पहले सभी संबंधित पक्षों (प्रतिवादियों) को सुना जाना अनिवार्य है।

Hemant Dhote

लेखक: हेमन्त धोटे छत्तीसगढ़ के एक सक्रिय पत्रकार और प्रिंट मीडिया से जुड़े व्यक्ति हैं, जो मुख्य रूप से रायपुर से संचालित होने वाले प्रतिष्ठित दैनिक हिंदी समाचार पत्र 'दैनिक नव प्रदेश' (Nav Pradesh) में निरंतर वरिष्ठ प्रबंधन/प्रतिनिधि मंडल एवं रायपुर ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं और अखबार के विभिन्न आयोजनों व गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। श्री हेमन्त धोटे ने रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTUJM) से (बी.जे.एम.सी और एम.ए.एम.सी) की पढ़ाई की है।

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