संपादकीय

संपादकीय: सरकारी स्कूलों के दिन बहुरने की उम्मीद

छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में एक बड़ी समस्या अध्ययन कक्षों की कमी रही है। साल दर साल विद्यार्थियों की संख्या तो बढ़ती जाती है लेकिन उस अनुपात में अतिरिक्त कमरे नहीं बन पाते। नतीजतन विद्यार्थियों को जर्जर शाला भवनों के खस्ताहाल कमरों में पढ़ाई करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। बहरहाल अब प्रदेश के बदहाल सरकारी स्कूलों के दिन बहुरने की उम्मीद बंधी है।

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कक्षों का निर्माण अब वीबी जी राम जी की सहायता से हो सकेगा। इसके अंतर्गत स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष के निर्माण के लिए एक लाख रुपये तक की राशि प्रदान की जाएगी। इस संदर्भ में वीबी जी राम जी के आयुक्त एवं लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं। स्कूलों में अतिरिक्त कमरों की आवश्यकता के बारे में स्कूल वार सूची लोक शिक्षण संचालनालय उपलब्ध कराएगा। इसके बाद ग्राम सभा के अनुमोदन के पश्चात अतिरिक्त कक्ष का निर्माण शुरू कराया जाएगा। निश्चित रुप से इससे सरकारी स्कूलों में स्थानाभाव की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।

इसके साथ ही सरकार को चाहिए कि वह बाबा आदम के जमाने के पुराने जर्जर स्कूलों की भी सुध ले जो खंडहर के रूप में तब्दील हो रहे हैं और वहां छात्र छात्राएं अपनी जान हथेली पर रखकर पढऩे के लिए विवश हैं। आज दिन ऐसे जर्जर शाला भवनों की छत टूटकर गिरने से कई छात्रों के हताहत होने की खबरें सामने आती रहती है। कई जगह स्थिति यह है खुद का शाला भवन कंडम होने के कारण किराए के मकानों में कक्षाएं संचालित करने की नौबत आ गई है जहां छात्र छात्राओं को शैक्षणिक वातावरण नहीं मिल पाता और पढ़ाई करने में भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

नतीजतन लोगों का सरकारी शालाओ से मोहभंग होने लगा है और वे निजी स्कूलों का रुख करने लगे हैं। सरकार को चाहिए कि वह खंडहर नुमा पुराने शाला भवनों की जगह नये शाला के निर्माण के लिए भी इसी तरह की पहल करे ताकि सरकारी स्कूलों की उपयोगिता कायम रहे।

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