झारखण्ड

Birth Certificate : जन्म प्रमाण पत्र के लिए कर्मचारी के पैर पकड़ने को मजबूर हुआ व्यक्ति, वीडियो सामने आते ही मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश

पाकुड़ जिले से सामने आए एक वीडियो ने सरकारी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े (Birth Certificate) कर दिए हैं। अपने बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए महीनों से भटक रहे एक व्यक्ति का सरकारी कर्मचारी के सामने गुहार लगाते और पैर पकड़ने की कोशिश करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।

वीडियो की जानकारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंची तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री ने तत्काल जिला प्रशासन को पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

तीन महीने से लगा रहा था कार्यालयों का चक्कर Birth Certificate

जानकारी के अनुसार, पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड के जामजोरी पंचायत निवासी दिनेश टुडू अपने भतीजे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पिछले करीब तीन महीने से सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे। कई बार आवेदन और अनुरोध के बाद भी काम पूरा नहीं होने से वह परेशान हो गए। बताया जा रहा है कि इसी दौरान वह संबंधित कर्मचारी से मदद की गुहार लगाते हुए उसके पैर पकड़ने की कोशिश करते नजर आए।

वायरल वीडियो के बाद हरकत में आया प्रशासन

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक व्यक्ति सरकारी कर्मचारी के सामने अपनी समस्या बताते हुए भावुक (Birth Certificate) नजर आता है। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में कर्मचारी भी उसे समझाने और कार्यालय के अंदर ले जाकर समस्या के समाधान का भरोसा देते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लेते हुए पाकुड़ के उपायुक्त को निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

बच्चे के भविष्य की जताई चिंता

पीड़ित का कहना है कि उसने बच्चे की पढ़ाई के लिए अपनी बकरी तक बेच दी है। यदि समय पर जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिला तो बच्चे का स्कूल में पंजीकरण नहीं हो पाएगा और उसकी पढ़ाई प्रभावित होगी। इसी चिंता में वह लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा था।

सोशल मीडिया पर लोगों का फूटा गुस्सा

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने नाराजगी (Birth Certificate) जताई। कई लोगों ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम नागरिकों को मूलभूत सेवाओं के लिए भी लंबे समय तक परेशान होना पड़ रहा है। कुछ लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। अब सभी की नजर जिला प्रशासन की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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