Bhilai Nigam Case: एजेंडा बिना कमिश्नर हटाने का प्रस्ताव अवैध, हाई कोर्ट ने याचिका खारिज
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भिलाई नगर निगम के कमिश्नर राजीव पांडेय को हटाने के प्रस्ताव पर बड़ा फैसला सुनाते हुए 32 पार्षदों की रिट याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में बहुमत महत्वपूर्ण है, लेकिन वह कानून और तय प्रक्रिया से ऊपर नहीं हो सकता। बजट के लिए बुलाई गई विशेष बैठक में बिना पूर्व सूचना और एजेंडा के कमिश्नर को हटाने का प्रस्ताव पारित करना पूरी तरह अवैध है। न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कहा कि ऐसे प्रस्ताव को लागू कराने के लिए अदालत राज्य सरकार को आदेश जारी नहीं कर सकती।
मामला भिलाई नगर निगम के निर्वाचित पार्षदों और निगम कमिश्नर राजीव पांडेय के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा है। पार्षदों का आरोप था कि कमिश्नर मेयर-इन-काउंसिल और सामान्य सभा की मंजूरी के बिना वित्तीय और प्रशासनिक फैसले ले रहे हैं तथा जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को लागू नहीं कर रहे। इसे लेकर महापौर ने 12 मार्च 2026 को मुख्य सचिव से शिकायत भी की थी।
बजट बैठक में लाया गया हटाने का प्रस्ताव
25 मार्च 2026 को निगम की विशेष बजट बैठक के दौरान पार्षदों ने अचानक नगर निगम अधिनियम की धारा 54(2) के तहत कमिश्नर को हटाने का प्रस्ताव रखा। पार्षदों का दावा था कि प्रस्ताव तीन-चौथाई बहुमत से पारित हुआ। इसके बाद महापौर और पार्षदों ने राज्य शासन से कमिश्नर को हटाने की मांग की। कार्रवाई नहीं होने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।
पार्षदों का तर्क
पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा, मनहरण लाल साहू और मोहम्मद नकीब ने दलील दी कि जब तीन-चौथाई निर्वाचित पार्षदों ने प्रस्ताव पारित कर दिया तो राज्य सरकार के पास उसे लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। सरकार निर्वाचित प्रतिनिधियों के निर्णय की समीक्षा नहीं कर सकती।
राज्य सरकार का पक्ष
उप महाधिवक्ता आनंद दादरिया ने कोर्ट को बताया कि 25 मार्च की बैठक केवल बजट के लिए बुलाई गई विशेष बैठक थी। नगर पालिका कार्य संचालन नियम 2016 के अनुसार विशेष बैठक में केवल वही विषय लिया जा सकता है, जिसका उल्लेख नोटिस में हो। कमिश्नर को हटाने का प्रस्ताव एजेंडा में शामिल नहीं था, इसलिए वह स्वत: अवैध है।
हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि विशेष बैठक में बिना एजेंडा नया प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। बजट और कमिश्नर को हटाना दो अलग विषय हैं। अदालत ने कहा कि केवल बहुमत से कोई प्रस्ताव वैध नहीं हो जाता, विधिक प्रक्रिया का पालन भी उतना ही आवश्यक है। चूंकि प्रस्ताव ही अवैध था, इसलिए उसे लागू करने का आदेश नहीं दिया जा सकता।
भविष्य में कार्रवाई का रास्ता खुला
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने कमिश्नर राजीव पांडेय के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यदि पार्षद या सक्षम प्राधिकारी कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दोबारा कार्रवाई करना चाहें तो वे इसके लिए स्वतंत्र हैं।



