संपादकीय

संपादकीय: सुप्रीम कोर्ट का सराहनीय फैसला

Editorial: एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे सभी प्रमुख सड़को पर पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए अतिक्रमणमुक्त फुटपाथ की व्यवस्था सुनिश्चित करें। निश्वित रूप से जनहित में यह सुप्रीम कोर्ट का सराहनीय फैसला है। देशभर के सभी महानगरों और प्रमुख शहरों के मुख्य मार्गो पर पद यात्रियों के लिए फुटपात तो बने हुए हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर बेजा कब्जा की भेंट चढ़ गये हैं। इन फुटपातों पर फुटकर समान बेचने वालों ने सालों से कब्जा कर रखा है।

स्थिति यह है कि इसे फटपाथ बाजार के नाम से भी जाना जाता है। नतीजतन इन फुटपातों पर राहगिरों का पैदल चलना मुश्किल हो जाता है और मजबूरी में उन्हें मुख्य सड़क पर पैदल चलना पड़ता है। जिसके चलते अक्सर पद यात्री वाहनों की चपेट में आकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इन फुटपाथों पर बेजा कब्जा रोकने की जिम्मेदारी उन शहरों के नगरीय निकायों पर होती है लेकिन वे अपनी यह जिम्मेदारी इमानदारी से नहीं निभाते क्योंकि फुटपाथ पर व्यवसाय करने वाले लोग संबंधित विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को हर महीने रिश्वत देते हैं। यही वजह है कि फुटपाथों से अवैध कब्जे हट नहीं रहे हैं।

बल्कि दिनों दिन बेजा कब्जे बढ़ते ही जा रहे हैं। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट पर केन्द्र सरकार को निर्देशित किया है कि जहां भी सड़क हो वहां पैदल चलने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए उचित रूप से चिन्हित और अतिक्रमण मुक्त स्थान पर फुटपाथ सुनिश्चित किया जाये। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि सीमांकित फुटपाथ पर चलना लोगों का मौलिक अधिकार है। इसलिए सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जहां भी सड़क हो वहां पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ के रूप में एक अलग जगह हो जिसे रस्सी या अन्य किसी माध्यम से चिन्हित किया जाये ताकि वहां पर किसी भी तरह का अतिक्रमण न हो।

जिन फुटपाथों पर अतिक्रमण है उन्हें तत्काल हटाया जाये। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर सरकार कितना अमल करती है। वैसे तो फुटपाथों पर जरूरत से ज्यादा बेजा कब्जा हो जाता है उसे हटाने के लिए संबधित नगरीय निकाय गाहे बगाहे अभियान चलाते हैं और फुटपाथ को बेजा कब्जों से मुक्त कराते हैं लेकिन दूसरे ही दिन से फिर उन फुटपाथों पर दुकानें लग जाती हैं।

फुटपाथों पर रोज लाखों का व्यवसाय होता है और इसका एक हिस्सा नगरीय निकायों के अधिकारियों की भी भेंट चढ़ता है। ऐसे में फुटपाथों से अतिक्रमण हटना बड़ी चुनौती है किन्तु यदि सरकार और नगरीय निकाय दृण इच्छा शक्ति का परिचय दें तो इन फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त बनाया जा सकता है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन किया जा सकता है।

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