छत्तीसगढ़

Senior Citizen Welfare : दो साल की दूरी हुई खत्म, बेटे को सामने देखते ही छलक पड़े मां के आंसू

कई बार परिवारों में पैदा हुई दूरियां ऐसी खामोशी छोड़ जाती हैं, जिसे शब्दों में बयां करना आसान (Senior Citizen Welfare) नहीं होता। एक बुजुर्ग मां भी ऐसी ही परिस्थितियों से गुजर रही थीं। घर से दूर बिताए गए वर्षों ने उन्हें अपनों से मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन एक पहल ने उनकी जिंदगी में फिर से खुशियां लौटा दीं।

महासमुंद में सामने आई यह भावुक कहानी रिश्तों की अहमियत और संवाद की ताकत को फिर से साबित करती है। दो साल बाद जब मां और बेटे आमने सामने आए तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

परिवार से दूर होकर पहुंचीं वृद्धाश्रम : Senior Citizen Welfare

70 वर्षीय लच्छनी बाई परिवारिक विवादों से परेशान होकर अपना घर छोड़ चुकी थीं। उन्होंने अपने जीवन का सहारा आशियाना वृद्धाश्रम में तलाशा, जहां वह पिछले दो से तीन वर्षों से रह रही थीं। उनके अनुसार परिवार में बेटों के बीच लगातार विवाद और तनाव का माहौल था, जिससे आहत होकर उन्होंने घर से अलग रहने का निर्णय लिया था।

जागरूकता शिविर में सामने आई कहानी

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के करुणा एवं वरिष्ठ नागरिक अधिकार सशक्तिकरण अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद द्वारा आशियाना वृद्धाश्रम में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।

इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद की प्रभारी सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री चेतना ठाकुर ने वृद्धजनों से संवाद किया। बातचीत के दौरान लच्छनी बाई ने अपने जीवन की कहानी और परिवार से बिछड़ने की पीड़ा साझा की।

परिजनों तक पहुंची पहल

मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी सचिव ने अधिकार मित्र जितेंद्र पटेल के माध्यम से लच्छनी बाई के परिजनों का पता लगवाया। इसके बाद परिवार के सदस्यों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय (Senior Citizen Welfare) बुलाया गया। यहां बेटों और पुत्रवधुओं को बुजुर्ग मां के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के बारे में समझाया गया। उन्हें सम्मान और संवेदनशीलता के साथ मां की देखभाल करने की सलाह दी गई।

समझाइश का हुआ असर

परामर्श और समझाइश के बाद परिवार के सदस्यों का दृष्टिकोण बदला। लच्छनी बाई के बेटे और पुत्रवधु उन्हें अपने साथ घर ले जाने के लिए तैयार हो गए। जब लंबे समय बाद मां और बेटे का मिलन हुआ तो माहौल भावुक हो गया। मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और परिवार के सदस्य भी भावनाओं को रोक नहीं सके।

रिश्तों को जोड़ने वाली पहल

इस पूरी प्रक्रिया ने यह संदेश दिया कि संवाद और समझाइश के माध्यम से टूटते रिश्तों को फिर से जोड़ा जा सकता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल ने एक बुजुर्ग मां को दोबारा अपने परिवार का साथ दिलाया और वर्षों से बिछड़े रिश्तों में नई गर्माहट लौटा दी। इस अवसर पर विभिन्न विभागों और संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस भावुक पुनर्मिलन को करीब से देखा।

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