छत्तीसगढ़

CABINET RESHUFFLE : मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच देर रात तक चली मुख्यमंत्री की आपात बैठक

राज्य सरकार के ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार रात मुख्यमंत्री निवास में मंत्रियों की विशेष बैठक बुलाई, जो देर रात तक चली।

सूत्रों के अनुसार बैठक में सरकार के कामकाज की समीक्षा के साथ आगामी ढाई वर्षों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। राजनीतिक गलियारों में चल रही अटकलों (CABINET RESHUFFLE) के बीच हुई इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री का मुख्य फोकस सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने तथा विभागों के लिए नया रोडमैप तैयार करने पर रहा। बैठक में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से सीधे संवाद कर उनके विभागों का रिपोर्ट कार्ड देखा और आगामी कार्ययोजना को लेकर सुझाव भी लिए। बताया जा रहा है कि क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने भी एक-एक मंत्री से उनके विभागीय कामकाज और जमीनी प्रदर्शन को लेकर चर्चा की।

कई मंत्री अपना दौरा रद कर पहुंचे

बैठक अचानक बुलाई गई थी, जिसके कारण कई मंत्रियों को अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद कर राजधानी पहुंचना पड़ा। बैठक में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश महामंत्री (संगठन) पवन साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, मंत्री केदार कश्यप, लखनलाल देवांगन, श्याम बिहारी जायसवाल, दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा, लक्ष्मी राजवाड़े सहित अन्य मंत्री मौजूद रहे।

विभागवार हुई समीक्षा

बैठक में विभागवार समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने चुनावी घोषणापत्र के अधूरे वादों को समय-सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया। साथ ही नौकरशाही में कसावट लाने और जनहित योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए।

मंत्रियों से कहा गया कि वे अपने विभागों के लिए नए लक्ष्य तय करें ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके। सरकार के शेष कार्यकाल को देखते हुए रणनीति (CABINET RESHUFFLE) और प्रदर्शन दोनों पर विशेष जोर दिया गया।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह बैठक अहम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को संगठन के साथ समन्वय बनाकर काम करने की हिदायत दी। बैठक में यह भी तय किया गया कि जमीनी कार्यकर्ताओं के सुझावों और समस्याओं को प्रशासनिक स्तर पर प्राथमिकता दी जाएगी।

सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए संगठन की भूमिका और मजबूत करने पर सहमति बनी। देर रात तक चली इस मैराथन बैठक को सरकार के संदेश (CABINET RESHUFFLE) के रूप में देखा जा रहा है कि आगामी ढाई वर्षों में प्रदर्शन और परिणामों पर पूरा फोकस रहेगा।

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