अहमदाबाद। गुजरात अध्ययन दौरे पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने सोमवार को अहमदाबाद के कालूपुर रेलवे स्टेशन का दौरा कर देश की पहली मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना (Bullet Train Project) के निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के उप मुख्य परियोजना प्रबंधक मनोज गुप्ता ने परियोजना की प्रगति, अत्याधुनिक इंजीनियरिंग, सुरक्षा मानकों और भविष्य की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि Bullet Train Project भारत के परिवहन क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का नया अध्याय साबित होगी।

508 किमी परियोजना अंतिम चरण की ओर Bullet Train Project
मनोज गुप्ता ने बताया कि 508 किलोमीटर लंबी Bullet Train Project का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। 13 जुलाई 2026 तक परियोजना के तहत 357 किलोमीटर वायाडक्ट (एलिवेटेड कॉरिडोर) और 452 किलोमीटर पियर (स्तंभ) का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इससे परियोजना के अधिकांश प्रमुख सिविल कार्य निर्णायक चरण में पहुंच चुके हैं।

17 नदी पुल और 14 स्टील पुल तैयार
उन्होंने बताया कि Bullet Train Project के अंतर्गत अब तक 17 नदी पुल, 5 प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC) पुल और 14 स्टील पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है। इन पुलों का निर्माण अंतरराष्ट्रीय मानकों और आधुनिक तकनीकों के अनुरूप किया गया है, ताकि हाई स्पीड ट्रेनों का सुरक्षित और निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
छह लाख से अधिक नॉइज बैरियर लगाए गए
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लगभग 297 किलोमीटर लंबे मार्ग पर छह लाख से अधिक नॉइज बैरियर लगाए जा चुके हैं, जिससे ट्रेन संचालन के दौरान आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। Bullet Train Project में ट्रैक निर्माण भी तेजी से जारी है। अब तक 212 किलोमीटर आरसी ट्रैक बेड तैयार हो चुका है, करीब 200 किलोमीटर ट्रैक स्लैब बनाए जा चुके हैं और 88 किलोमीटर ट्रैक स्लैब पर सीमेंट एस्फाल्ट मोर्टार (CAM) इंजेक्शन का कार्य पूरा किया जा चुका है।

ओएचई और सुरंग निर्माण में भी तेज प्रगति
मनोज गुप्ता ने बताया कि Bullet Train Project के तहत अब तक 8,900 से अधिक ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (OHE) मस्त स्थापित किए जा चुके हैं, जो करीब 199 किलोमीटर मुख्य वायाडक्ट को कवर करते हैं। गुजरात के वलसाड जिले की पर्वतीय सुरंग पूरी हो चुकी है, जबकि महाराष्ट्र के पालघर जिले में बनने वाली सात सुरंगों में से तीन का ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक हो चुका है।
उन्होंने बताया कि मुंबई महानगर क्षेत्र में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) से शिलफाटा के बीच प्रस्तावित 21 किलोमीटर लंबी सुरंग परियोजना की सबसे जटिल इंजीनियरिंग उपलब्धियों में शामिल है। इसमें पांच किलोमीटर खुदाई NATM तकनीक से पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 16 किलोमीटर सुरंग टनल बोरिंग मशीन (TBM) से बनाई जाएगी।

विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होंगे 12 स्टेशन
Bullet Train Project के अंतर्गत गुजरात के साबरमती और सूरत तथा महाराष्ट्र के ठाणे में तीन प्रमुख रोलिंग स्टॉक डिपो विकसित किए जा रहे हैं। यहां बुलेट ट्रेनों का रखरखाव और तकनीकी सेवाएं उपलब्ध होंगी।
परियोजना के सभी 12 स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी है। गुजरात के आठ स्टेशनों पर फिनिशिंग कार्य तेजी से चल रहा है। इन स्टेशनों को डिजिटल सूचना प्रणाली, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था, एस्केलेटर, लिफ्ट और दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है।

जापान की तकनीक से बनेगी सुरक्षित हाई स्पीड रेल
मनोज गुप्ता ने बताया कि Bullet Train Project में जापान की प्रसिद्ध शिंकानसेन प्रणाली के अनुभवों का उपयोग किया जा रहा है। सिग्नलिंग, संचार, ट्रैक, विद्युत प्रणाली और संचालन व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में ट्रेन को स्वतः रोकने वाली अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली भी परियोजना का हिस्सा है।

पत्रकारों ने जाना आधुनिक इंजीनियरिंग का मॉडल
अध्ययन दौरे के दौरान छत्तीसगढ़ के पत्रकारों ने कालूपुर रेलवे स्टेशन परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने गुणवत्ता नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, भूमि अधिग्रहण, स्थानीय रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण और भविष्य की संचालन व्यवस्था को लेकर कई सवाल पूछे, जिनका विस्तार से जवाब दिया गया।
मनोज गुप्ता ने कहा कि Bullet Train Project केवल दो महानगरों को जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गुजरात और महाराष्ट्र के औद्योगिक, व्यावसायिक और शहरी क्षेत्रों को नई आर्थिक गति देने के साथ भारत को हाई स्पीड रेल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।


