
राज्य के कई सरकारी दफ्तरों और विभागों में लंबे समय से जमा अनुपयोगी सामान को लेकर फिर चर्चा (Scrap Disposal) तेज हो गई है। मंत्रिपरिषद के नए फैसले के बाद अब पुराने वाहनों, लोहे के कबाड़ और बेकार सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर अफसरों के बीच हलचल देखी जा रही है। अलग अलग विभागों में इस बात पर भी बातचीत शुरू हो गई है कि अब पुरानी फाइलों और स्क्रैप सामग्री को हटाने की प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान हो जाएगी।
सरकारी कार्यालयों में जगह की कमी और कबाड़ के बढ़ते ढेर को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में अब नई अवधि के लिए व्यवस्था बढ़ने के बाद माना जा रहा है कि विभागों को राहत मिलेगी। कई जगहों पर अधिकारी इसे प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करने वाला फैसला बता रहे हैं।
तीन साल और जारी रहेगी व्यवस्था : Scrap Disposal
मंत्रिपरिषद ने राज्य के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, मंडलों और स्थानीय निकायों में जमा स्क्रैप और अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण के लिए मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ सेलिंग एजेंसी अनुबंध की अवधि अगले तीन वर्षों तक बढ़ाने का फैसला लिया है। यह व्यवस्था नवंबर 2019 से लागू है और इसकी अवधि 31 मई 2026 को खत्म होने वाली थी। अब इसे आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
ई नीलामी से होगी बिक्री
स्क्रैप सामग्री के निस्तारण के लिए अत्याधुनिक ई नीलामी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर के खरीदार ऑनलाइन प्रतिस्पर्धी बोली लगा सकेंगे। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और राज्य को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रणाली के कारण निस्तारण प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित और तकनीक आधारित हो गई है। इससे राजस्व बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
विभागों को मिलेगा बड़ा फायदा
नई व्यवस्था लागू रहने से अलग अलग विभागों को हर बार नई निविदा और विज्ञापन प्रक्रिया पूरी नहीं करनी (Scrap Disposal) पड़ेगी। इससे प्रशासनिक समय की बचत होगी और अतिरिक्त संसाधनों पर होने वाला खर्च भी कम होगा। इसके साथ ही सरकारी कार्यालय परिसरों में जमा पुराने सामान को हटाने से साफ सफाई और स्थान प्रबंधन में भी सुधार देखने को मिलेगा।
तकनीक आधारित प्रक्रिया पर जोर
राज्य सरकार अब कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तकनीक आधारित बनाने पर जोर (Scrap Disposal) दे रही है। स्क्रैप निस्तारण की यह व्यवस्था भी उसी दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।



