Ram Mandir : दान की रकम से लेकर गायब रिकॉर्ड तक, राम मंदिर जांच में अब कौन से सवाल सबसे बड़े बन गए
अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गड़बड़ी मामले को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार (Ram Mandir) तेज हो रहा है। मंदिर परिसर और उससे जुड़े प्रशासनिक इंतजामों पर लोगों की नजर बनी हुई है। श्रद्धालुओं के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच किस दिशा में बढ़ रही है और अब तक जांच टीम को क्या जानकारी मिली है।
इसी बीच तीन सदस्यीय विशेष जांच दल लगातार दस्तावेजों, रिकॉर्ड और संबंधित लोगों से पूछताछ में जुटा हुआ है। जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे वैसे कई नए पहलू सामने आ रहे हैं। खासकर डिजिटल रिकॉर्ड और दान से जुड़े आंकड़े जांचकर्ताओं के लिए बड़ी चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं।
कई लोगों से पूछताछ की कोशिश Ram Mandir
जांच टीम लखनऊ पहुंच चुकी है और जल्द अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार जांचकर्ताओं ने गोपाल राव के भतीजे सोमेश आनंद और एक अन्य व्यक्ति से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों उपलब्ध नहीं हो सके। बताया जा रहा है कि उनके मोबाइल फोन भी बंद मिले।
इसके साथ ही मंदिर ट्रस्ट की ओर से की गई कर्मचारियों की नियुक्तियों और रिकॉर्ड रखरखाव से जुड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है। लंबे समय से कार्यरत सुरक्षाकर्मियों और अन्य कर्मचारियों का विवरण भी मांगा गया है।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद की नियुक्तियां भी जांच के दायरे में
जांच का दायरा केवल दान रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रखा गया है। जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद हुई नियुक्तियों, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जा रही है। जांच अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि विभिन्न व्यवस्थाओं में किस स्तर पर जिम्मेदारियां तय थीं और रिकॉर्ड किस प्रकार सुरक्षित रखे जा रहे थे।
महाकुंभ के दौरान मिले दान पर विशेष नजर
जांच टीम 66 दिनों के महाकुंभ काल के दौरान प्राप्त दान का रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। उस दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए थे।
जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के बावजूद दान पात्रों में जमा राशि अपेक्षा से कम क्यों दिखाई (Ram Mandir) दे रही है। इसी बिंदु को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। मंदिर से जुड़े कुछ कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है। उनके बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
सोना चांदी और कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की पड़ताल
रामलला को अर्पित किए गए सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान उपहारों के रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा रही है। इस सिलसिले में संबंधित प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई है।
जांचकर्ता यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि कीमती वस्तुओं की प्राप्ति, भंडारण और लेखा प्रक्रिया किस प्रकार संचालित की गई। एक महिला द्वारा अपने आभूषण दान करने के मामले सहित कई रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
डिजिटल सबूत क्यों बन रहे चुनौती
जांच के दौरान सबसे बड़ी परेशानी डिजिटल रिकॉर्ड को लेकर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार मंदिर परिसर का सीसीटीवी फुटेज केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रहता है। इसके बाद रिकॉर्डिंग स्वतः हट जाती है।
ऐसे में कई पुराने वीडियो रिकॉर्ड तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। जांचकर्ताओं के लिए यह पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है कि कथित गड़बड़ी की शुरुआत कब हुई और यह कितने समय तक जारी रही।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। अब तकनीकी विशेषज्ञ हटाए गए या बदले गए डेटा को वापस प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।
बयानों में मिले कई विरोधाभास
डिजिटल साक्ष्यों की सीमित उपलब्धता के कारण जांच टीम अब कर्मचारियों, अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के बयानों पर अधिक ध्यान दे रही है।
पूछताछ के दौरान मिले बयानों की तुलना पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों के बयानों से की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक कई जगह विरोधाभास सामने आए हैं, जिन्हें जांच के लिए महत्वपूर्ण सुराग माना जा रहा है।
आरोपों के बाद बनी थी एसआईटी
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को दान राशि में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इसके बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो गई थी।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। यह टीम पूरे मामले की जांच (Ram Mandir ) कर रही है।
ट्रस्ट का कहना है कि आंतरिक ऑडिट की प्रक्रिया जारी है और अब तक आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जाएगी और सच्चाई सामने लाई जाएगी।



