Mango Price : 3 रुपये किलो पर पहुंचा आम का भाव, लागत भी नहीं निकल रही, किसान पेड़ों पर छोड़ रहे फसल
आम का सीजन इस बार कई किसानों के लिए कमाई नहीं, बल्कि चिंता लेकर (Mango Price) आया है। बाजार में दाम लगातार गिरने से हालात ऐसे बन गए हैं कि किसान फसल की तुड़ाई तक नहीं करा रहे। कई बागों में आम पेड़ों पर ही सड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें तोड़कर बाजार तक पहुंचाने का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है।
तमिलनाडु के कई आम उत्पादक इलाकों में किसान भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। लगातार घटती कीमतों के कारण कुछ किसानों ने अपने बाग काटने तक का फैसला कर लिया है। किसान संगठनों ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर राहत देने की मांग की है।
3 रुपये किलो तक गिरा खेत का भाव Mango Price
मदुरै जिले के मेलूर क्षेत्र में तोतापुरी यानी किली मूकू किस्म के आम का खेत स्तर पर भाव घटकर सिर्फ 3 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। इस क्षेत्र में एक हजार एकड़ से अधिक जमीन पर आम की खेती होती है। लेकिन मौजूदा कीमतों के कारण किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
एक एकड़ पर लाखों का खर्च
किसानों का कहना है कि एक एकड़ आम के बाग की देखभाल, सिंचाई, दवा, खाद और अन्य खर्च मिलाकर हर साल करीब एक लाख रुपये तक खर्च हो जाता है। इसके बावजूद बाजार में मिलने वाला भाव इतना कम है कि खेती घाटे का सौदा बन गई है। पिछले दो वर्षों में आम की कीमतें लगातार गिरती गई हैं।
बाजार में महंगा, किसान को नहीं मिल रहा फायदा
किसानों का कहना है कि खेत पर आम का भाव सिर्फ 3 रुपये प्रति किलो (Mango Price) है, जबकि यही आम खुदरा बाजार में 40 रुपये या उससे अधिक कीमत पर बिक रहा है। आम से बनने वाले जूस और अन्य उत्पाद भी ऊंचे दाम पर बिकते हैं, लेकिन इसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा है।
तुड़ाई कराना भी पड़ रहा महंगा
मौजूदा हालात में मजदूरी, ढुलाई, कमीशन और अन्य खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। किसानों के अनुसार एक मजदूर की दैनिक मजदूरी लगभग 700 रुपये है। ऐसे में कई बार पूरी फसल बेचने के बाद भी तुड़ाई का खर्च नहीं निकलता। इसी वजह से कई किसानों ने आम की तुड़ाई बंद कर दी है और फलों को पेड़ों पर ही छोड़ दिया है।
एमएसपी की मांग हुई तेज
किसान संगठनों ने सरकार से आम के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि उत्पादन लागत को देखते (Mango Price) हुए कम से कम 20 रुपये प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य तय किया जाना चाहिए। साथ ही फल पल्प और जूस उद्योगों के माध्यम से किसानों से सीधे खरीद की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
कई जिलों में गहराया संकट
किसानों का कहना है कि यह समस्या केवल मदुरै तक सीमित नहीं है। कृष्णागिरि, सलेम, धर्मपुरी और डिंडीगुल जैसे प्रमुख आम उत्पादक जिलों में भी किसान इसी तरह की परेशानी का सामना कर रहे हैं। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो बड़ी संख्या में किसान आम की खेती छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं, जिसका असर आने वाले वर्षों में उत्पादन पर भी पड़ सकता है।



