
कर्नाटक की राजनीति में गुरुवार सुबह अचानक हलचल तेज (Karnataka Politics) हो गई जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की खबर सामने आई। मुख्यमंत्री आवास के बाहर सुबह से ही नेताओं और समर्थकों की आवाजाही बढ़ गई थी। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच लगातार चर्चाएं चलती रहीं और माहौल पूरी तरह राजनीतिक गतिविधियों से गर्म नजर आया।
इस्तीफे की खबर फैलते ही कई जगह समर्थकों ने नाराजगी भी जताई। कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए राहुल गांधी की तस्वीर जलाकर अपना गुस्सा जाहिर किया। वहीं कांग्रेस नेताओं के बीच लगातार बैठकों का दौर चलता रहा और सत्ता परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
मंत्रियों की बैठक में किया बड़ा ऐलान : Karnataka Politics
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को नाश्ता बैठक के लिए बुलाया था। इसी बैठक में उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान किया। बैठक के दौरान उन्होंने मंत्रियों को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और पिछले तीन साल के कामकाज का ब्यौरा भी सामने रखा। बताया जा रहा है कि इस दौरान माहौल काफी भावुक नजर आया।
अगले मुख्यमंत्री के लिए रखा नाम
सिद्धारमैया ने बैठक में डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव भी रखा। हालांकि अभी विधायक दल की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। बताया गया है कि विधायक दल की बैठक 29 मई की शाम बेंगलुरु में बुलाई गई है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में नए नेता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
राज्यपाल नहीं होने से बदली प्रक्रिया
मुख्यमंत्री दोपहर में इस्तीफा सौंपने के लिए लोकभवन पहुंचेंगे। लेकिन राज्यपाल के बेंगलुरु से बाहर होने के कारण अब इस्तीफा राजभवन सचिवालय को सौंपा जाएगा। इसी बीच संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है कि राज्यपाल की गैरमौजूदगी में आगे की कार्रवाई किस तरह पूरी होगी।
भाजपा ने साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते (Karnataka Politics) हुए कहा कि शुरुआत से ही सत्ता साझा करने को लेकर विवाद था। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान के कारण सरकार सही तरीके से काम नहीं कर पाई। साथ ही वित्तीय कुप्रबंधन और विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए।
सत्ता परिवर्तन की चर्चा तेज
डीके शिवकुमार के बेंगलुरु पहुंचने के बाद राजनीतिक हलचल और बढ़ गई। मुख्यमंत्री आवास पर दोनों नेताओं की मुलाकात भी चर्चा में रही। बताया जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया अब लगभग तय मानी जा रही है और आने वाले घंटों में तस्वीर और साफ हो सकती है।



