
मनेंद्रगढ़ जिले के घुटरा गांव के 42 वर्षीय व्यक्ति की अनोखी कहानी
नाम सुनकर चौंक जाते हैं लोग, पहचान साबित करने दिखाना पड़ता है आधार कार्ड
राकेश मेघानी.
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी/नवप्रदेश। न कभी चुनाव लड़ा… न किसी संवैधानिक पद पर बैठे… फिर भी नाम है ‘राष्ट्रपति,! (President of Manendragarh) छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के घुटरा गांव में रहने वाले 42 वर्षीय इस शख्स की कहानी जितनी अनोखी है, उतनी ही दिलचस्प भी…। माता-पिता ने नाम रखा था राजपति, लेकिन स्कूल में दाखिले के दौरान हुई एक छोटी-सी चूक ने उन्हें ‘राष्ट्रपति’ बना दिया। चौथी कक्षा में गलती का पता चला, मगर तब तक देर हो चुकी थी। देखते ही देखते यही नाम सरकारी दस्तावेजों से लेकर आधार कार्ड तक दर्ज हो गया।
दरअसल, राष्ट्रपति के माता-पिता ने उनका नाम राजपति रखा था। बचपन में जब स्कूल में दाखिला हुआ, तब किसी तरह नाम लिखने में ऐसी चूक हुई कि राजपति की जगह राष्ट्रपति दर्ज हो गया। शुरुआती दिनों में इस गलती का अहसास नहीं हुआ। जब वे चौथी कक्षा में पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि स्कूल के रिकॉर्ड में उनका नाम कुछ और है। उन्होंने नाम सुधारने के लिए स्कूल से संपर्क भी किया, लेकिन जरूरी दस्तावेजों के अभाव में मामला आगे नहीं बढ़ सका। ग्रामीण परिवेश, नियम-कायदों की सीमित जानकारी और प्रक्रिया की जटिलताओं के बीच नाम सुधारने की कोशिश अधूरी रह गई। धीरे-धीरे यही नाम उनकी शैक्षणिक पहचान से लेकर सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच गया।

कई बार लोग मजाक करना समझ लेते हैं
आठवीं कक्षा तक पढ़े राष्ट्रपति (President of Manendragarh) के आधार कार्ड समेत दूसरे अभिलेखों में भी यही नाम दर्ज है। इस तरह एक छोटी-सी गलती स्थायी पहचान में बदल गई। राष्ट्रपति कहते हैं कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से मिलता-जुलता नाम किसी को बताते हैं, तो लोग पहले हैरान हो जाते हैं। कई बार लोग इसे मजाक समझते हैं, तब उन्हें अपना पहचान पत्र दिखाना पड़ता है। हालांकि यह नाम एक गलती से पड़ा, लेकिन आज यही मेरी पहचान है। गांव के लोग मुझे राष्ट्रपति के नाम से बुलाते हैं। अब यह अच्छी लगता है और अब मुझे नाम भी नहीं बदलना है।
बैंकिंग, दस्तावेज संबंधी कामों में परेशानी हुई
राजपति से राष्ट्रपति (President of Manendragarh) बनने की यह कहानी सिर्फ एक नाम बदलने की नहीं है, यह उस इंसान के आत्मविश्वास की मिसाल है, जिसने हालात को कमजोरी नहीं, पहचान बना लिया। स्कूल की गलती ने उन्हें हंसी का पात्र भी बनाया, सवालों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन उन्हें कभी निराशा नहीं हुई। बैंकिंग, दस्तावेज और अन्य कामों में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन यह उनके नाम सहित देश के सर्वोच्च पद से जुड़ा है, जिससे उन्हें गर्व होता है।

राष्ट्रपति भवन और पीएमओ तक पहुंचा मामला
घुटरा गांव में ‘राष्ट्रपति’ नाम के व्यक्ति को प्रशासनिक, शासकीय अभिलेखों और बैंकिंग कार्यों में आ रही गंभीर दिक्कतों को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा पत्राचार किया। राष्ट्रपति सचिवालय ने 17 सितंबर को इस याचिका को आधिकारिक तौर पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय के गृह सचिव तथा विधि एवं न्याय विभाग के संयुक्त सचिव के ध्यानार्थ भेजते हुए आवश्यक कदम उठाने और की गई कार्रवाई की सूचना सीधे याचिकाकर्ता को देने के निर्देश दिए हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय में भी इस महत्वपूर्ण नीतिगत विषय पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। सौरव मिश्रा ने केंद्र सरकार के समक्ष मांग रखी है कि प्रशासनिक और व्यवहारिक कठिनाइयों से बचने के लिए एक स्पष्ट नीति बनाई जाए। उन्होंने आग्रह किया है कि संवैधानिक पदों तथा राष्ट्रीय गरिमा से जुड़े शब्दों (जैसे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और भारत) के व्यक्तिगत नाम के रूप में उपयोग को विनियमित करने के लिए उचित कानूनी प्रावधान और दिशा-निर्देश तय किए जाएं, ताकि भविष्य में नागरिकों को अपने नाम के कारण किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।



