छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Police AI Audit : कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने खोला करोड़ों के खेल का राज, पुलिस विभाग में कैसे पकड़ा गया वेतन का बड़ा घोटाला

बस्तर में पुलिस विभाग से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना (Chhattisgarh Police AI Audit) हुआ है। शुरुआत में किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड में इतनी बड़ी गड़बड़ी छिपी हो सकती है। लेकिन जब नई तकनीक की मदद से जांच शुरू हुई तो एक के बाद एक ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने पूरे विभाग को चौंका दिया।

जांच आगे बढ़ने के साथ साफ हुआ कि मामला केवल रिकॉर्ड की गलती का नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही कथित हेराफेरी का है। शुरुआती कार्रवाई के बाद तीन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और अब पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता की जांच में खुली गड़बड़ी Chhattisgarh Police AI Audit

बस्तर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आंतरिक और बाहरी ऑडिट के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली का इस्तेमाल किया गया। इसी जांच में वेतन खर्च में असामान्य बढ़ोतरी सामने आई। इसके बाद रिकॉर्ड की विस्तार से जांच की गई, जिसमें करोड़ों रुपये के कथित वेतन घोटाले का खुलासा हुआ।

मामले में आरक्षक गिरीश राय, राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू को गिरफ्तार किया गया है। गिरीश राय पुलिस अधीक्षक कार्यालय की वेतन शाखा में सहायक के रूप में कार्यरत था, जबकि अन्य दोनों आरक्षक अलग अलग शाखाओं में तैनात थे।

रिकॉर्ड में बदलाव कर निकाली अतिरिक्त रकम

जांच के अनुसार गिरीश राय वेतन तैयार होने से पहले रिकॉर्ड की सॉफ्ट कॉपी में कथित बदलाव करता था। इसके बाद अपना और दो अन्य आरक्षकों का वेतन बढ़ाकर सरकारी खाते से अतिरिक्त राशि निकलवाई जाती थी। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार भी किया है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अक्टूबर 2023 से मई 2026 के बीच सरकारी खातों से लगभग डेढ़ करोड़ से दो करोड़ रुपये तक की राशि अवैध तरीके (Chhattisgarh Police AI Audit) से निकाली गई।

किसे माना जा रहा है मुख्य आरोपी

पुलिस के अनुसार गिरीश राय वर्ष 2012 से पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ था और उसकी नियुक्ति अनुकंपा के आधार पर हुई थी। जांच एजेंसियां उसे पूरे मामले का मुख्य आरोपी मान रही हैं।

जांच में यह भी पता चला कि कुछ कर्मचारियों का वेतन कथित रूप से लोन देने के नाम पर बढ़ाया गया। बाद में उसी अतिरिक्त राशि को लोन की किस्त या वापसी बताकर नकद वापस ले लिया जाता था। ऐसे कर्मचारियों की पहचान कर उनसे भी पूछताछ की जा रही है ताकि उनकी भूमिका स्पष्ट हो सके।

लंबे समय तक क्यों नहीं हुई भनक

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक विभाग में हर महीने कर्मचारियों के तबादले, नई नियुक्ति और संख्या में बदलाव के कारण वेतन व्यय में उतार चढ़ाव होता (Chhattisgarh Police AI Audit) रहता है। इसी वजह से हर महीने थोड़ी थोड़ी बढ़ी राशि सामान्य बदलाव जैसी दिखाई देती रही और कथित गड़बड़ी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आई।

आखिर कैसे खुला पूरा मामला

पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऑडिट प्रणाली ने वेतन भुगतान में असामान्य पैटर्न की पहचान की। इसके बाद वेतन रिकॉर्ड, डिजिटल फाइलों और बैंक लेनदेन की गहन जांच की गई, जिससे कथित गबन सामने आया।

जांच पूरी होने के बाद 29 जून को जगदलपुर थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और सरकारी धन के कथित गबन सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। अगले दिन उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

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