CG TRTI Award: जनजातीय अनुसंधान में छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय डंका, उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिला बडा सम्मान
जनजातीय संस्कृति, विरासत संरक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (CG TRTI) को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने संस्थान को ‘उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण पत्र (Certificate of Excellence)’ प्रदान किया है। यह सम्मान ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन समारोह में दिया गया। इस उपलब्धि को जनजातीय अनुसंधान, संस्कृति संरक्षण और नवाचार आधारित विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की मजबूत पहचान के रूप में देखा जा रहा है। कार्यशाला में देश के 29 राज्यों के जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
राष्ट्रीय कार्यशाला में मिला सम्मान CG TRTI Award
भुवनेश्वर में 7 और 8 जुलाई को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य देशभर के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को और मजबूत बनाना था। समापन सत्र में छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान को उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के संस्थानों के प्रदर्शन, अनुसंधान गतिविधियों और जनजातीय विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। इसी दौरान छत्तीसगढ़ के कार्यों को सराहते हुए संस्थान को उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
केंद्रीय मंत्री और विशेषज्ञ रहे मौजूद
कार्यशाला में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव, केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, नीति आयोग के सदस्य बाला सुब्रमणियम, ओडिशा सरकार के आदिम जाति विकास मंत्री नित्यानंद गोंड तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने जनजातीय समुदायों के समग्र विकास, अनुसंधान और सांस्कृतिक संरक्षण को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता भी बताई।
AI और GIS जैसी तकनीकों पर हुआ मंथन
राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान जनजातीय अनुसंधान संस्थानों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने जीआईएस (GIS), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इनोवेशन इकोसिस्टम और डिजिटल तकनीकों के जरिए जनजातीय अनुसंधान को नई दिशा देने पर विचार साझा किए। इसके साथ ही नीति आधारित अनुसंधान, योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और भविष्य की रणनीतियों पर भी विस्तृत मंथन हुआ। विभिन्न राज्यों द्वारा किए गए नवाचारों और अनुसंधान कार्यों का भी प्रस्तुतीकरण किया गया।
छत्तीसगढ़ दल की रही सक्रिय भागीदारी
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी निभाई। राज्य का प्रतिनिधित्व संस्थान की संचालक हिना अनिमेष नेताम, संयुक्त संचालक गायत्री नेताम, सहायक अनुसंधान अधिकारी डॉ. अनिल विरूलकर और योगेंद्र निषाद ने किया। प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ में जनजातीय समुदायों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास से जुड़े अनुसंधान कार्यों तथा संरक्षण गतिविधियों की जानकारी भी साझा की।
जनजातीय संस्कृति संरक्षण में लगातार बेहतर काम
कार्यशाला के समापन अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा ने छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान को उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण पत्र प्रदान किया। संस्थान लंबे समय से राज्य की जनजातियों की संस्कृति, परंपरा, कला, शिल्प, सामाजिक जीवन और आर्थिक विकास पर अनुसंधान कर रहा है। साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों और संरक्षण गतिविधियों के माध्यम से जनजातीय विरासत को सहेजने का कार्य भी लगातार किया जा रहा है। इसी सतत प्रयास के चलते संस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान प्राप्त हुआ।



