छत्तीसगढ़

CG Agriculture : बस्तर में बढ़ेगा तिलहनी फसलों का रकबा, 225 एकड़ में रामतिल-तिल की खेती शुरू

रायपुर। कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra) ने बस्तर में किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू की है। खरीफ सीजन में जिले के विभिन्न विकासखंडों में 225 एकड़ क्षेत्र में रामतिल (Niger) और तिल (Sesame) के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (Frontline Demonstration) कराए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली तिलहनी फसलों को बढ़ावा देना है।

200 एकड़ में रामतिल, 25 एकड़ में तिल की खेती

योजना के तहत बस्तानार, बस्तर, दरभा और चित्रकोट के गुरिया क्षेत्र में 200 एकड़ में रामतिल का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें 100 से 200 प्रगतिशील किसानों को शामिल किया जा रहा है। प्रत्येक किसान को एक से दो एकड़ क्षेत्र के लिए उन्नत बीज और आधुनिक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं तोकापाल और बस्तर विकासखंड में 25 एकड़ क्षेत्र में तिल की खेती का प्रदर्शन किया जा रहा है, जहां अधिकांश स्थानों पर बुआई का कार्य लगभग पूरा हो चुका है।

कम लागत, ज्यादा मुनाफे वाली फसल

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार रामतिल (Niger) और तिल (Sesame) ऐसी तिलहनी फसलें हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम होती है और कीट-रोग का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम रहता है। इससे किसानों की उत्पादन लागत घटती है और शुद्ध लाभ बढ़ता है।

धान उत्पादन को भी मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का कहना है कि रामतिल के पीले फूल बड़ी संख्या में मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं। इससे प्राकृतिक परागण (Natural Pollination) बढ़ता है और आसपास के धान के खेतों की उत्पादकता पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। इस तरह यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ कृषि पारिस्थितिकी को भी मजबूत करेगी।

बस्तर में बदल रही खेती की तस्वीर

खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और बेहतर बाजार मूल्य को देखते हुए बस्तर के किसानों का रुझान फिर से तिलहनी फसलों की ओर बढ़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र का मानना है कि इस पहल से वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलेगा, लागत घटेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। आने वाले वर्षों में जिले में तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ने की उम्मीद है।

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