संपादकीय: पाकिस्तान की गीदड़ भभकी

Editorial: पड़ौसी देश पाकिस्तान के हुक्मरानों को बार बार भारत को गीदड़ भभकी देने में पता नहीं क्या हासिल होता है? खुद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है और वहां गृहयुद्ध भड़कने के हालात पैदा हो गए हैं। उपर से उसने अफगानिस्तान में हवाई हमला कर एक अस्पताल को निशाना बनाकर चार सौ लोगों को मौत के मुंह में पहुंचा कर तालिबानियों का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ाने की मूर्खता कर डाली है। अब तालिबान ने भी पाकिस्तान से आर पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
खैबर फख्तुनवा और पीओके में भी बगावत की आंधी चल रही है और पाकिस्तान है कि भारत को उकसाने पर उतारू है। वहां के राजनयिक अब्दुल वासित जो भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके हैं ने भड़काऊ बयान दिया है कि यदि जंग के इस माहौल में अमेरिका ने पाकिस्तान पर हमला करने का दु:साहस किया तो पाकिस्तान भारत पर हमला कर नई दिल्ली और मुंबई को निशाना बनाएगा। इसे ही कहते हैं ये मुंह और मसूर की दाल।
खुद तो उनके घर में खाने को दाने नहीं हैं और अम्मा चली है भुनाने। दो नाव पर सवारी कर पाकिस्तान खुद मुसीबत मोल ले चुका है। ईरान भी कब अपना आपा खोकर इस दगाबाज पाकिस्तान पर बम बरसाने लगे इसका कोई ठिकाना नहीं है। यदि उसने ईरान की पैरोकारी की तो उसका आका अमेरिका उसे कहीं का नहीं छोड़ेगा। इसमें भारत भला कहां बीच में आ रहा है जिसे पाकिस्तान का यह टुच्चा नेता बेवजह धमका रहा है।
यह तो भारत की भलमनसाहत है कि वह इस मौके का अनुचित लाभ नहीं उठा रहा है वरना पाकिस्तान के मौजूदा हालात को मद्देनजऱ रखकर भारत ने आपरेशन सिंदूर पार्ट शुरू कर दिया तो पाकिस्तान टुकड़े टुकड़े हो जाएगा। बेहतर होगा कि पाकिस्तानी हुक्मरान होश की दवा करें और इस तरह की भड़काऊ बयानबाजी कर आ बैल मुझे मार वाली कहावत को चरितार्थ करने की मूर्खता न करें।



