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छत्तीसगढ़ भाजपा में बड़े बदलावों की आहट : कोर ग्रुप पुनर्गठन से सत्ता-संगठन में नई हलचल

2028 चुनाव की रणनीति पर मंथन तेज

पंकज शर्मा

रायपुर/नवप्रदेश। Major changes await Chhattisgarh BJP: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रही बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों ने नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। राजधानी रायपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में 12 और 13 मई को हुई कोर कमेटी, प्रदेश पदाधिकारियों और प्रदेश कार्यसमिति की बैठकों को पार्टी के भीतर बड़े बदलावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इन्हें नियमित संगठनात्मक समीक्षा और आगामी कार्यक्रमों की रणनीतिक बैठक बताया जा रहा है, लेकिन सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर संभावित पुनर्संतुलन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बुधवार को आयोजित प्रदेश कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, प्रदेश पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष और संगठन से जुड़े करीब 400 नेता शामिल हुए।

बैठक में आगामी 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर तक संगठन विस्तार, सामाजिक संतुलन, सरकार-संगठन समन्वय और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा पर व्यापक चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों के अनुसार कार्यसमिति बैठक में दो अहम प्रस्तावों पर भी सहमति बनने की संभावना जताई गई। पहला प्रस्ताव नक्सलवाद की समाप्ति के लिए केंद्र और राज्य सरकार को धन्यवाद देने से जुड़ा है, जबकि दूसरा प्रस्ताव महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर विपक्ष के रुख की निंदा से संबंधित बताया जा रहा है।

कोर कमेटी में बड़े बदलाव, नए चेहरों की एंट्री :
मंगलवार को हुई भाजपा कोर कमेटी की बैठक सबसे ज्यादा चर्चा में रही। इस बैठक में संगठनात्मक ढांचे में अहम बदलाव करते हुए कई नए नेताओं को शामिल किया गया, जबकि कुछ वरिष्ठ नेताओं की भूमिका में परिवर्तन के संकेत दिखाई दिए। सूत्रों के मुताबिक उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी और पूर्व मंत्री-विधायक अमर अग्रवाल को नई कोर कमेटी में शामिल किया गया है।

इसे भाजपा के भीतर नई पीढ़ी और आक्रामक राजनीतिक शैली वाले नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, रामविचार नेताम, विक्रम उसेंडी, रेणुका सिंह, सांसद बृजमोहन अग्रवाल और गौरीशंकर अग्रवाल बैठक में मौजूद नहीं रहे। इसके बाद इन नेताओं के कोर ग्रुप से बाहर किए जाने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तेज हो गईं। प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने कोर ग्रुप के पुनर्गठन की पुष्टि भी की है।

भाजपा में गुटबाजी को लेकर कांग्रेस का हमला
नई कोर कमेटी को लेकर विपक्षी कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा के भीतर गुटबाजी चरम पर पहुंच चुकी है। दीपक बैज ने कहा, ‘बृजमोहन अग्रवाल पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। भाजपा उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। एक अनुभवी नेता को नजरअंदाज करना भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी को उजागर करता है। ‘ उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा में लगातार अंदरूनी खींचतान बढ़ रही है और संगठनात्मक बदलाव उसी का परिणाम हैं।

बृजमोहन का पलटवार — ‘मुझे कोई किनारे नहीं कर सकता
कांग्रेस के आरोपों पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘भाजपा कोर कमेटी में रखना और निकालना बेहद सामान्य प्रक्रिया है। मैं पिछले दस वर्षों तक कोर कमेटी का हिस्सा रहा हूं। मेरे साथ कोई सौतेला व्यवहार नहीं कर सकता। ‘ उन्होंने आगे कहा, ‘मैं जब तक सक्रिय हूं, तब तक मुझे कोई किनारे नहीं कर सकता और न ही मेरे साथ कोई सौतेला व्यवहार कर सकता है। कोई भी व्यक्ति एक ही जगह जिंदगी भर नहीं रहेगा और समय-समय पर लोग बदलते रहते हैं। ‘ बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा, ‘कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है। कांग्रेस पहले अपने संगठन की चिंता करे, फिर भाजपा के बारे में सोचना शुरू करे। ‘

रिक्शा से पहुंचे भाजपा नेता, काफिले पर भी चर्चा
प्रदेश कार्यसमिति बैठक के दौरान भाजपा के कुछ नेता रिक्शा से बैठक स्थल पहुंचे, जबकि उनके पीछे सुरक्षा काफिला चलता दिखाई दिया। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद भाजपा नेताओं ने काफिलों में कटौती का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ई-वाहनों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसी मुद्दे पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा सरकारी वाहनों में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और काफिला घटाने की बात कही गई थी।

‘अब तक सरकार क्या कर रही थी? दीपक बैज
ओपी चौधरी के बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, ‘यह शर्मनाक बयान है कि समीक्षा करेंगे। अब तक सरकार क्या कर रही थी? पहले कहा जा रहा था कि किसी तरह की कोई किल्लत नहीं है और अब लीपापोती की जा रही है। ‘ उन्होंने कहा कि केवल काफिला कम करने से समस्या हल नहीं होगी। सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और विपक्ष से भी चर्चा करनी चाहिए। दीपक बैज ने कहा, ‘नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पहले ही आर्थिक संकट को लेकर आगाह कर चुके थे। ‘

सत्ता और संगठन में बदलाव की चर्चा क्यों?
छत्तीसगढ़ भाजपा इस समय दो समानांतर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहली, सरकार अपने कार्यकाल के ढाई वर्ष पूरे होने की ओर बढ़ रही है और दूसरी, संगठन में कई बड़े पदाधिकारियों के कार्यकाल को लेकर समीक्षा चल रही है। प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के भविष्य को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा तेज बताई जा रही है। भाजपा सूत्रों का दावा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ में सरकार और संगठन दोनों को लेकर फीडबैक और सर्वे कराया है। उसी आधार पर आगे की रणनीति बनाई जा रही है। यही वजह है कि अब चर्चा केवल छोटे बदलावों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक पुनर्संतुलन की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं।

क्या किसी डिप्टी सीएम को मिलेगी राष्ट्रीय जिम्मेदारी?
भाजपा के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि राज्य के किसी एक उप मुख्यमंत्री को संगठन में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस संदर्भ में विजय शर्मा का नाम सबसे अधिक चर्चा में है, हालांकि कुछ हलकों में उप मुख्यमंत्री अरुण साव का नाम भी सामने आ रहा है। पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि भाजपा ऐसे नेताओं को आगे लाना चाहती है जो चुनावी प्रबंधन, आक्रामक राजनीति और संगठन विस्तार में प्रभावी साबित हुए हों। इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन अपनी नई टीम तैयार कर सकते हैं। लंबे समय तक छत्तीसगढ़ प्रभारी रहने के कारण वे यहां के नेताओं की कार्यशैली से परिचित हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ के कुछ नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिलने या दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

महिला डिप्टी सीएम फॉर्मूले की चर्चा :
अगर डिप्टी सीएम स्तर पर बदलाव होता है तो भाजपा किसी महिला चेहरे को आगे कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में लता उसेंडी और रेणुका सिंह के नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक भाजपा महिला प्रतिनिधित्व, आदिवासी वोट बैंक और सरगुजा-बस्तर क्षेत्रीय संतुलन को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। इस रणनीति के जरिए भाजपा एक साथ कई राजनीतिक संदेश देना चाहती है— महिला नेतृत्व को बढ़ावा, आदिवासी क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ मजबूत करना, सामाजिक संतुलन साधना, 2028 चुनाव से पहले नया नेतृत्व तैयार करना है।

मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें तेज :
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व पर केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा बरकरार है और फिलहाल मुख्यमंत्री बदलने जैसी कोई संभावना नहीं है। बल्कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव भी उनके नेतृत्व में लडऩे की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं। पार्टी सूत्रों का दावा है कि 2 से 4 मंत्रियों के चेहरे बदले जा सकते हैं। इस बार पार्टी वरिष्ठता के बजाय नए और सक्रिय चेहरों को प्राथमिकता देने के मूड में दिखाई दे रही है। राजनीतिक गलियारों में जिन संभावित नामों की चर्चा है उनमें भावना बोहरा, पुरंदर मिश्रा, सुशांत शुक्ला और सरगुजा क्षेत्र की किसी आदिवासी महिला विधायक का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है।

बूथ से लेकर सत्ता तक नई रणनीति :
प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में संगठन को गांव और बूथ स्तर तक मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। आगामी बैठकों की रूपरेखा, कार्यकर्ताओं के विस्तार अभियान और सामाजिक संपर्क कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब केवल सरकार चलाने के मोड में नहीं है, बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव के लिए दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति पर काम शुरू कर चुकी है। पार्टी युवा, आक्रामक और सामाजिक संतुलन वाले नेतृत्व को आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रही है। बरहाल संगठनात्मक संकेतों और बदलते आंतरिक समीकरणों ने साफ कर दिया है कि आने वाले महीनों में छत्तीसगढ़ भाजपा में सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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