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पेपर लीक: केवल परीक्षा नहीं, लाखों परिवारों के सपनों पर चोट

हेमंत धोटे

रायपुर/नवप्रदेश। देश में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं केवल छात्रों की योग्यता जांचने का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि इनके साथ लाखों परिवारों की उम्मीदें, त्याग और वर्षों की मेहनत जुड़ी होती है। विशेषकर NEET जैसी परीक्षाएं, जिनके लिए छात्र दिन-रात एक कर देते हैं और माता-पिता अपनी जरूरतों को पीछे छोड़ बच्चों के भविष्य को संवारने में लग जाते हैं। ऐसे में जब पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह केवल परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं होती, बल्कि लाखों मेहनती छात्रों और उनके परिवारों के विश्वास पर सीधा प्रहार होता है। आज स्थिति यह है कि पेपर लीक देश की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था की सबसे गंभीर समस्याओं में बदल चुका है।

हर वर्ष किसी न किसी बड़ी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की खबर सामने आती है। 2014 के CPMT से लेकर 2015 के AIPMT , 2016 के यूपीपीएससी RO/ARO और PCS , 2018 के CBSE बोर्ड परीक्षा, 2021 के PTET और NEET , 2024 के GC NET तथा यूपी पुलिस भर्ती तक अनेक परीक्षाएं इस समस्या की शिकार हो चुकी हैं। वर्ष 2026 में भी NEET UG परीक्षा से पहले कथित गेस पेपर वायरल होने और लगभग 125 प्रश्न मिलने के दावे के बाद परीक्षा रद्द होने की स्थिति ने छात्रों की चिंता और अविश्वास को और गहरा कर दिया है। यह घटनाएं केवल समाचार नहीं होतीं। इनके पीछे लाखों छात्रों की टूटी हुई मानसिक स्थिति, परिवारों की बेचैनी और वर्षों की मेहनत का दर्द छिपा होता है। एक छात्र अकेला तैयारी नहीं करता। उसके साथ पूरा परिवार तैयारी करता है।

पिता अपनी सीमित आय में कोचिंग और पढ़ाई का खर्च उठाते हैं, मां हर दिन बच्चे की पढ़ाई, खानपान और मानसिक स्थिति का ध्यान रखती है। घर का वातावरण तक परीक्षा के अनुसार बदल जाता है। छात्र परीक्षा हॉल में अकेला बैठता है, लेकिन उस एक सीट तक पहुंचाने के लिए पूरा परिवार संघर्ष करता है। ऐसे में जब परीक्षा रद्द होती है या दोबारा परीक्षा की बात होती है, तो सबसे बड़ा आघात उन छात्रों को लगता है जिन्होंने ईमानदारी से मेहनत की होती है। दोबारा तैयारी केवल किताबें खोलने का नाम नहीं है।

यह टूटे हुए आत्मविश्वास, बिगड़ी हुई मानसिक स्थिति और खत्म हो चुकी पढ़ाई की लय को फिर से संभालने की लड़ाई होती है। कई छात्र मानसिक तनाव, चिंता और निराशा का सामना करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ता है। सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि आखिर मेहनत करने वाले छात्रों का दोष क्या है? क्यों कुछ लोगों की बेईमानी का दंड लाखों ईमानदार छात्रों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ता है? परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही चूक यह संकेत देती है कि केवल बयान और आश्वासन अब पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत एक ऐसी मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था की है, जिसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और दोषियों पर त्वरित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो।

सरकार और संबंधित एजेंसियों को यह समझना होगा कि पेपर लीक केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं के भविष्य और उनके विश्वास से जुड़ा विषय है। यदि मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा शिक्षा व्यवस्था से उठने लगा, तो यह किसी भी समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति होगी। पेपर लीक केवल एक परीक्षा को प्रभावित नहीं करता, यह मेहनत, ईमानदारी और लाखों परिवारों के सपनों को तोड़ देता है।

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