दो कदम प्रकृति की ओर: गौरैया, जल और हरियाली बचाने का जन अभियान बना मिसाल

जयदेव सिंह
महासमुंद/नवप्रदेश। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में जहां अधिकांश लोग प्रकृति और बेजुबान जीव-जंतुओं की चिंता करने का समय नहीं निकाल पा रहे हैं, वहीं महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम आमाकोनी की ‘टीम दो कदम प्रकृति की ओर समितिÓ पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने में जुटी हुई है। पिछले एक दशक से समिति के सदस्य बिना किसी प्रचार-प्रसार की अपेक्षा के धरातल पर सक्रिय रहकर पेड़-पौधों, पक्षियों, जल स्रोतों और गोवंश संरक्षण के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।
समिति ने पर्यावरण संरक्षण को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और जीवनशैली का हिस्सा बना लिया है। यही कारण है कि आज उनके प्रयासों की चर्चा न केवल महासमुंद जिले में बल्कि प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच रही है।
पौधारोपण नहीं, पौधों को पेड़ बनाने का संकल्प
समिति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह केवल पौधारोपण कर फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पौधों की नियमित देखभाल कर उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित करती है। वर्षों पहले लगाए गए पौधे आज विशाल वृक्ष बनकर लोगों को छाया, शुद्ध हवा और फल प्रदान कर रहे हैं। समिति के संस्थापक एवं टीम लीडर संजय साहू, जो पेशे से फार्मासिस्ट हैं, बताते हैं कि प्रकृति को हरा-भरा बनाने के लिए उनकी टीम हर वर्ष सैकड़ों पौधे लगाती है। और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उठाती है।
गौरैया बचाने की मुहिम बनी पहचान
बढ़ते शहरीकरण और आधुनिक निर्माण शैली के कारण गौरैया सहित कई छोटे पक्षियों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। इन पक्षियों को सुरक्षित आश्रय और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समिति ने विशेष अभियान शुरू किया है। समिति द्वारा गांव-गांव में पक्षियों के लिए विशेष रूप से तैयार मिट्टी के बसेरे (नेस्ट बॉक्स) लगाए जा रहे हैं, ताकि गौरैया और अन्य पक्षियों को प्राकृतिक आवास मिल सके। यही नहीं, गर्मी के मौसम में पक्षियों के लिए पानी और दाना उपलब्ध कराने के लिए मिट्टी के सकोरे भी वितरित किए जा रहे हैं। समिति के प्रयासों का परिणाम है कि अब तक 9 गांवों को ‘गौरैया ग्रामÓ के रूप में विकसित किया जा चुका है। पक्षियों के लिए तैयार किए गए मिट्टी के बसेरे अब छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ-साथ देश के कई राज्यों तक पहुंच चुके हैं। समिति का लक्ष्य है कि ‘हर घर हो बसेराÓ, ताकि पक्षियों को सुरक्षित घोंसला बनाने के लिए स्थान मिल सके।
जल संरक्षण और गौसेवा को भी बनाया मिशन
समिति का मानना है कि जल और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं। इसी सोच के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जल के सदुपयोग को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही भीषण गर्मी में बेसहारा गोवंश के लिए पानी की व्यवस्था करना भी समिति की प्राथमिकताओं में शामिल है। समिति के सदस्य विभिन्न स्थानों पर पानी की टंकियां और पात्र रखकर गोवंश की प्यास बुझाने का कार्य कर रहे हैं।



