संपादकीय: एसआईआर वैध करार

Editorial: सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर के खिलाफ दाखिल की गई याचिकाओं को सिरे से खारिज करते हुए अपने ऐतिहासिक फैसले में एसआईआर को वैध करार दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि एसआईआर निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग को एसआईआर कराने का पूर्ण अधिकार है, इसलिए इस प्रक्रिया को पूरी तरह संवैधानिक माना जाना चाहिए। इस प्रक्रिया में कहीं कोई विसंगति नहीं है और न ही चुनाव आयोग द्वारा जो प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं, उसे चुनाव आयोग की मनमानी कहा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से विपक्षी दलों के नेताओं को करारा झटका लगा है, जो लगातार एसआईआर की प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा रहे थे और चुनाव आयोग पर मनगढ़ंत आरोप लगा रहे थे। बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व वहां चुनाव आयोग ने एसआईआर कराया और अपात्र मतदाताओं के नाम काटे, तो विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर भारी शोर मचाया था। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तो “वोट चोर गद्दी छोड़” का नया नारा दे दिया था।
किन्तु चुनाव आयोग अपने काम पर लगा रहा और बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम जब एनडीए के पक्ष में गए, तो विपक्ष ने फिर एसआईआर को लेकर विधवा विलाप शुरू कर दिया। इसके बाद हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के पूर्व भी वहां एसआईआर कराया गया और लाखों बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से विलोपित किए गए, तब भी ममता बनर्जी ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। किन्तु हर जगह उन्हें मुंह की खानी पड़ी।
बंगाल में भाजपा ने प्रचंड जीत दर्ज की, तो ममता बनर्जी इसे वोट चोरी का नाम देने लगीं। उनके सुर में सुर मिलाते हुए राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव ने भी फिर से एसआईआर की प्रक्रिया का विरोध करना शुरू किया। किन्तु अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। एसआईआर को चुनाव आयोग की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद देश के बाकी सभी राज्यों में भी एसआईआर की प्रक्रिया तेज होगी।
वास्तव में यह भारतीय लोकतंत्र के हित में है, जिसका विरोध करके विपक्षी पार्टियां अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की नाकाम और हास्यास्पद कोशिशें कर रही हैं। कभी वे अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग के सिर पर फोड़ती हैं, तो कभी ईवीएम को दोषी ठहराती हैं और अब एसआईआर को अपनी हार का कारण बता रही हैं। बेहतर होगा कि वे सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले को शिरोधार्य करें और अब एसआईआर की प्रक्रिया पर उंगली उठाना बंद करके अपने पराजय के कारणों की समीक्षा करें।



