संपादकीय

संपादकीय: टीएमसी की नई नौटंकी


Editorial: 4 मई को बंगाल की जनता ने तृणमूल कांग्रेस के पन्द्रह साल के कुशासन को उखाड़ कर फेंक दिया था। खुद ममता बनर्जी चुनाव हार गई। इसके बाद से टीएमसी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। ममता बनर्जी इस सदमे से उतरी भी नहीं है कि उनके समर्थकों पर शुवेन्दु अधिकार की सरकार ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। घुसपैठिये खदेड़े जा रहे हैं। टीएमसी के गुंडों की गिरफ्तारी हो रही है। पुलिस उनके जुलूस निकाल रही है। टीएमसी नेताओं और गुंडों के बेजा कब्जा हटाने बुलडोजर कार्यवाही की जा रही है। टीएमसी नेता जहां दिखाई देते हैं जनता उन्हें चोर चोर के नारे लगाकर चिढ़ाती है। टीएमसी नेताओं के खिलाफ लोगों में सिर्फ गुस्सा नहीं है बल्कि वे टीएमसी से नफरत करने लगे हैं। खुद ममता बनर्जी अपने घर में दुबक कर बैठी हैं।

इंडी गठबंधन वाले भी उन्हें भाव नहीं दे रहे हैं। वे खुद होकर फोन करती हैं तो कोई फोन भी नहीं उठाता। उनकी पार्टी का हाल यह है कि पार्षद से लेकर विधायक और सांसद सभी बगावत पर उतारू हो गए हैं। यह तो गनीमत है कि भाजपा ने टीएमसी नेताओं के लिए अपने दरवाजे बंद रखे हुए हैं वरना टीएमसी टूट गई होती। इन सब हालातों को मद्देनजर रखकर नौटंकीबाज़ ममता बनर्जी ने नई नौटंकी शुरू की है। जनता की सहानुभूति पाने के लिए उन्होंने वही पुराना घिसा पिटा फार्मूला अपनाया है के अपने नेताओ को किराए के टट्टुओं के हाथों बेइज्जत करवाओ और विधवा विलाप करते हुए मौजूदा सरकार पर बदले की कार्रवाई का झूठा आरोप लगाते हुए जार जार आंसू बहाओ।

ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर कथित हमला और टीएमसी के सबसे बड़े नौटंकीबाज़ कल्याण बनर्जी पर तथाकथित हमला टीएमसी की नई नौटंकी ही है। अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले के आरोप में जो पांच आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं वे टीएमसी के ही कार्यकर्ता निकले हैं। कल्याण बनर्जी पर भी कथित हमला करने वाले टीएमसी के ही कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। जाहिर ये सब प्रायोजित कार्यक्रम है। अब इन तथाकथित हमलों को लेकर ममता बनर्जी हो हल्ला मचा रही हैं और भाजपा पर बदले की कार्यवाही का आरोप लगा रही हैं। साथ ही साथ यह धमकी भी दे रही हैं कि कोई भी सत्ता में हमेश नहीं रहता है।

ममता बनर्जी ने खुद होकर इंडी गठबंधन के नेताओं से मदद की गुहार लगाई तब कहीं जाकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दो सांसदों पर हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की। सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े तथा राजद नेता तेजस्वी यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी नेताओं ने भी अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर हुए कथित हमलों की कड़ी निंदा की और भाजपा पर बदले की कार्यवाही करने का आरोप लगाया।

दरअसल ममता बनर्जी अब इंडी गठबंधन में भी अगल थलग पड़ चुकी हैं और वे बंगाल से अपना बोरिया बिस्तार बंधने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में जाने की जुगत कर रही हैं। जिस इंडी गठबंधन की उन्होंने कभी परवाह नहीं की और बंगाल में एकला चलो रे की नीति पर अमल करती रही अब वे बंगाल की जनता द्वारा धुतकार दिये जाने के बाद इंडी गठबंधन में अपनी जगह तलाश रही हैं। जिसकी बैठक छह जून को होने वाली है। इसमें उन्हें महत्व मिले इसीलिए उन्होंने यह नया खेला किया है किन्तु वे भूल गई हैं कि अब इंडी गठबंधन में उन्हें उसी समय तरजीह मिलेगी जब वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अपना नेता मानने के लिए राजी हो जायें।

वैसे भी दिल्ली की राजनीति में ऐसे हारे हुए जुआरियों को कोई महत्व नहीं मिलता। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अरविंद केजरीवाल, तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे हैं जो सत्ता से बाहर होने के बाद आज कहां गुम हो गये हैं इसको कोई अता पता नहीं है वही हाल ममता बनर्जी का है। बंगाल में मिली करारी शिकस्त के साथ उनकी पूछपरख कम होना कोई ताज्जुब की बात नहीं है भले ही वे इसके लिए कितनी भी नौटंकी कर लें लेकिन इंडी गठबंधन में अब उन्हें उचित स्थान नहीं मिल पाएगा। खासतौर पर कांग्रेस पार्टी उनके मनसूबे को हरगीज पूरा नहीं होने देगी।

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