बहुमंजिला पार्किंग को लेकर जन सुनवाई जरूरी

युजवेंद्र सिंह
अधिवक्ता दुर्ग
दुर्ग के एक सजग नागरिक और अधिवक्ता होने के नाते शहर के विकास, प्रशासन की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक संपत्तियों के संधारण (रखरखाव) को लेकर ये चिंताएं बेहद गंभीर और विचारणीय हैं। दुर्ग नगर क्षेत्र के नागरिक की रूप में मेरे द्वारा उठाए गए बिंदु—जैसे केवल उद्घाटन पट्टिकाओं तक सीमित रहना, संपत्तियों का सही प्रबंधन न होना, अतिक्रमण और रखरखाव का अभाव—किसी भी जीवंत लोकतंत्र में स्थानीय प्रशासन को आईना दिखाने के लिए आवश्यक हैं।
इंदिरा मार्केट में प्रस्तावित बहुमंजिला (मल्टीलेवल) पार्किंग बनाम ओपन (खुली) पार्किंग के विषय पर विश्लेषण व्यावहारिक धरातल पर एक बड़ा प्रश्न खड़ा करता है। इस पर दोनों पक्षों के पहलुओं को इस तरह समझा जा सकता है:
बहुमंजिला पार्किंग और मेरी/नागरिक की चिंताएं
सकारात्मक पक्ष: इंदिरा मार्केट जैसे घने और
व्यावसायिक क्षेत्र में जमीन की उपलब्धता सीमित होती है। ऐसे में वर्टिकल (ऊपर की ओर) निर्माण ही कम जगह में अधिक वाहनों को समाहित करने का एकमात्र तकनीकी विकल्प बचता है ताकि सड़कों पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिल सके।
नकारात्मक पक्ष (जिसकी ओर मेरे/नागरिक द्वारा ध्यान आकर्षित किया):
यदि पूर्व के अनुभवों की तरह इस बहुमंजिला इमारत का भी संधारण ठीक से नहीं हुआ, तो यह केवल असामाजिक तत्वों, गंदगी और अवैध कब्जों का केंद्र बनकर रह जाएगी। ऐसी बड़ी परियोजनाओं में भारी बजट खर्च होता है, और यदि इसका लाभ जनता को न मिलकर अव्यवस्था के रूप में सामने आए, तो यह वास्तव में “नया सिरदर्द” साबित हो सकता है।
खुली पार्किंग का विकल्प
सकारात्मक पक्ष: जैसा कि एक सुझाव है, खुली पार्किंग में रख-रखाव का खर्च बेहद कम होता है, सुरक्षा और निगरानी रखना आसान होता है, और इसमें किसी बड़े ढांचे के अभाव के कारण बंद कमरों या कोनों में होने वाली गंदगी या अवैध गतिविधियों की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
चुनौती: मुख्य चुनौती यह है कि इंदिरा मार्केट जैसे व्यस्त क्षेत्र में क्या इतनी बड़ी खुली भूमि उपलब्ध है जो भविष्य की बढ़ती गाड़ियों की संख्या को संभाल सके?
समाधान का मार्ग: एक नागरिक और विधिक दृष्टिकोण-
प्रशासन की इस उदासीनता और आने वाली कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं:
पीपीपी (Public Private Partnership) मॉडल की मांग: यदि नगर निगम बहुमंजिला पार्किंग बनाता है, तो इसके संचालन और रखरखाव का जिम्मा किसी पेशेवर निजी एजेंसी को कड़े नियमों के साथ दिया जाना चाहिए, ताकि निगम की उदासीनता का असर इस पर न पड़े।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों की भागीदारी: योजना को अंतिम रूप देने से पहले इंदिरा मार्केट के व्यापारी संघ और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के साथ एक जन-सुनवाई या बैठक होनी चाहिए, ताकि धरातल की समस्याओं को नक्शे में शामिल किया जा सके।
अतिक्रमण और संधारण के लिए आरटीआई (RTI) व जनहित याचिका (PIL): पिछले 25 वर्षों में जिन संपत्तियों का संधारण नहीं हुआ या जहाँ अवैध कब्जे हुए हैं, उनकी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगकर प्रशासन पर विधिक दबाव बनाया जा सकता है।
शहरों का विकास केवल सीमेंट और कंक्रीट के ढांचे खड़े करने से नहीं, बल्कि उनके दीर्घकालिक प्रबंधन से होता है। नागरिकों की सजगता दुर्ग नगर निगम के लिए एक महत्वपूर्ण फीडबैक है।
एक जागरूक नागरिक के तौर पर, क्या हमे इस विषय में नगर निगम आयुक्त या महापौर या निकायों के उच्चाधिकारियों को कोई औपचारिक सुझाव-पत्र या ज्ञापन सौंपने का विचार किया जाना चाहिए है?



